नगर निगम कर्मचारियों को राहत: नियमितिकरण पर हाई कोर्ट ने कमिश्नर को 90 दिन की समय सीमा दी

बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम में वर्ष 1999 और 2002 से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नियमितीकरण का दावा खारिज करने वाले आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए प्रत्येक कर्मचारी के मामले में अलग-अलग विचार कर 90 दिनों के भीतर नया और कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिया है।
चालक, सुपरवाइजर और सफाई कर्मचारी सहित छह कर्मचारियों ने याचिका दायर कर कहा था कि वे सभी वर्ष 1999 एवं 2002 से लगातार बिना किसी व्यवधान के नगर निगम में कार्यरत हैं। दो दशक से अधिक समय से सेवा देने के बावजूद 15 जनवरी 2024 के आदेश से उनका नियमितीकरण, इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उनकी नियुक्ति 31 दिसंबर 1997 से पहले नहीं हुई थी, 5 मार्च 2008 के शासन के परिपत्र में यही शर्त निर्धारित है।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामलों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। नगर निगम की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा, 5 मार्च 2008 के परिपत्र के अनुसार, 31 दिसंबर 1997 से पहले नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ही नियमितीकरण के पात्र हैं। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 1999 से 2002 के बीच हुई थी, इसलिए उनका दावा नियमों के अनुरूप नहीं है। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ता लंबे समय से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनके नियमितीकरण के दावे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने 15 जनवरी 2024 का आदेश रद्द करते हुए नगर निगम आयुक्त को प्रत्येक याचिकाकर्ता के मामले में अलग-अलग विचार करने व कानून के अनुसार 90 दिनों के भीतर कारणयुक्त निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है, यदि किसी कर्मचारी ने नियमितीकरण नियम लागू होने तक 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है और उसके विरुद्ध कोई गंभीर आपत्ति या कदाचार नहीं है, तो उसके नियमितीकरण के दावे पर व्यावहारिक और न्यायसंगत तरीके से विचार किया जाना चाहिए।