हर साल बढ़ रहे पुरुषों की हत्या के मामले : इंदौर के सोनम रघुवंशी केस से लेकर पुणे के सिया गोयल कांड तक, पत्नियों से जुड़े हत्या के मामलों को लेकर पुरुष अधिकार संगठन चिंता जता रहे हैं। संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों से पुरुषों में डर और असुरक्षा बढ़ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में पति की हत्या के 322 मामले सामने आए, जबकि 232 पुरुषों की आत्महत्या के मामले दर्ज हुए। इनमें करीब 60 फीसदी हत्याओं की वजह अवैध संबंध बताई गई है। पति की हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश 93 मामलों के साथ पहले और मध्य प्रदेश 36 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।
राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन से करीब 70 एनजीओ और 10-12 हजार पुरुष अधिकार कार्यकर्ता जुड़े होने का दावा किया गया है। आंदोलन से जुड़े लोगों में डॉ. एपी सिंह, दीपिका नारायण भारद्वाज, बरखा त्रेहान, पंकज पंत, अशोक दशोरा और जकी अहमद समेत कई नाम शामिल हैं।
पंकज पंत के मुताबिक, पुरुषों के लिए संचालित तीन हेल्पलाइनों पर 2025 में 58,289 कॉल आई थीं, जबकि जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 87,969 हो गई। मध्य प्रदेश में भी कॉल्स 8,108 से बढ़कर 12,577 पहुंच गईं।
पौरुष संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा के अनुसार, उनकी संस्था ऐसे मामलों का रिकॉर्ड तैयार कर रही है, जिसमें हत्या की वजह और संबंधित खबरों की जानकारी शामिल है। वहीं, भाई संस्था के जकी अहमद का दावा है कि कई पुरुष पत्नी और उसके प्रेमी द्वारा हत्या की साजिश की आशंका जताकर मदद मांगते हैं।
पुरुषों को कानूनी अधिकार और सहायता उपलब्ध कराने के लिए SIFONE ऐप भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद पुरुषों को अधिकारों और कानूनी मदद से संबंधित सहायता उपलब्ध कराना है।