रिटायरमेंट के बाद विभागीय जांच नहीं चलेगी! हाई कोर्ट ने पूर्व डिविजनल मैनेजर की चार्जशीट की रद्द

बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच जारी रखने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित सेवा नियमों में रिटायरमेंट के बाद विभागीय जांच जारी रखने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो विभाग कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकता।
कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के सेवानिवृत्त डिविजनल मैनेजर नंदकिशोर अग्रवाल के खिलाफ 24 जुलाई 2019 को जारी चार्जशीट को निरस्त कर दिया।
रायपुर निवासी नंदकिशोर अग्रवाल छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में डिविजनल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। निगम ने उन्हें 24 जुलाई 2019 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया था। इसके ठीक सात दिन बाद, 31 जुलाई 2019 को वे अधिवार्षिकी आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए।
रिटायरमेंट के बाद भी विभागीय जांच जारी रखने के फैसले को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 13 अगस्त 2019 को चार्जशीट के प्रभाव और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 11 अगस्त 2026 को वन विकास निगम से पूछा कि क्या लागू सेवा नियमों में कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद विभागीय जांच जारी रखने का कोई प्रावधान है।
इस पर निगम ने 20 अगस्त को शपथ पत्र पेश किया, लेकिन वह ऐसा कोई नियम या प्रावधान नहीं बता सका, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद विभागीय जांच जारी रखी जा सके।
कोर्ट ने पाया कि छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम कर्मचारी सेवा विनियम, 1984 में सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच जारी रखने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई को सेवानिवृत्ति के बाद तभी जारी रखा जा सकता है, जब संबंधित सेवा नियम इसकी स्पष्ट अनुमति देते हों।
हाई कोर्ट ने माना कि बाध्यकारी न्यायिक फैसलों के अनुसार कर्मचारी के सेवा से बाहर होते ही सामान्य विभागीय जांच समाप्त हो जाती है। रिटायरमेंट के बाद जांच जारी रखने के लिए सेवा नियमों में विशेष प्रावधान होना अनिवार्य है।
चूंकि वन विकास निगम के 1984 के सेवा विनियमों में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं था, इसलिए निगम के पास नंदकिशोर अग्रवाल के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय कार्रवाई जारी रखने का अधिकार नहीं था।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 24 जुलाई 2019 को जारी चार्जशीट को रद्द कर दिया।