हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मिसकैरेज की छुट्टी मातृत्व अवकाश में नहीं होगी एडजस्ट, महिला कर्मचारी को नहीं रोक सकते मातृत्व लाभ

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि मिसकैरेज के दौरान लिया गया अवकाश बाद में हुई गर्भावस्था के लिए मिलने वाले मातृत्व अवकाश में समायोजित नहीं किया जा सकता। साथ ही, केवल लीव बैलेंस कम होने के आधार पर महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

डिवीजन बेंच ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है। सिंगल बेंच ने महिला कर्मचारी को मिसकैरेज और मातृत्व से संबंधित कुल 90 दिन के अवकाश का लाभ देने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही वेतन से काटी गई 80,254 रुपये की राशि वापस करने का आदेश भी दिया गया था।

मामला FCI के रायपुर जिला कार्यालय में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत किरण गौतम शर्मा से जुड़ा है। वर्ष 2019 में गर्भावस्था के दौरान 25 अप्रैल को मेडिकल जटिलताओं के कारण एक भ्रूण का मिसकैरेज हो गया। वहीं, दूसरे भ्रूण की गर्भावस्था को डॉक्टरों ने हाई रिस्क बताते हुए लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी। इसके बाद 3 सितंबर 2019 को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया।

इस दौरान किरण शर्मा ने मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश के साथ निजी अस्पताल में कराए गए इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति का भी दावा किया। विभाग ने उनके दावों को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 13 मई 2026 को महिला कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश के लिए कुल 90 दिन का लाभ देने का निर्देश दिया। साथ ही वेतन से काटी गई राशि को बरकरार नहीं रखने और मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति के दावे पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने को कहा।

सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ FCI ने डिवीजन बेंच में अपील की थी। अब डिवीजन बेंच ने भी FCI को राहत नहीं देते हुए अपील खारिज कर दी और सिंगल बेंच के आदेश को कायम रखा। कोर्ट के इस फैसले से महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।