हाईकोर्ट में 20 कोर्ट मैनेजर और 19 भृत्य नियुक्त, 3 सितंबर तक जॉइनिंग अनिवार्य
Sandhya 29/08/2026

बिलासपुर। हाईकोर्ट बिलासपुर में कोर्ट मैनेजर और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने 25 अगस्त को यह आदेश जारी किया। सभी नियुक्तियां 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के अधीन रहेंगी।
रिक्त पदों के लिए कुछ माह पहले आवेदन मंगाए गए थे। प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद पात्र अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की चयन सूची जारी करने के बाद अब उनकी पदस्थापना भी कर दी गई है।
जारी आदेश के अनुसार अंकित कुमार झा को हाईकोर्ट में कोर्ट मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं उदयन दुबे को दुर्ग, संयोगिता सिंह को कमर्शियल कोर्ट रायपुर, रमाकांत पटेल को अंबिकापुर, विरज कुमार देवांगन को कोरबा, राहुल वर्मा को कोरिया, अभिजीत रथ को महासमुंद, प्रवीण कुमार को रामानुजगंज, आशुतोष कुमार को बेमेतरा, निधि नागवंशी को बिलासपुर और ऋचा पाठक को धमतरी जिला न्यायालय में पदस्थ किया गया है।
इसके अलावा विजय कुमार साहू को कवर्धा, मनोज कुमार सिंह को रायपुर, प्रतिभा लकड़ा को कांकेर, बाम्पी दुबे को राजनांदगांव, कोमल भोई को जगदलपुर, शैलेन्द्र सिंह भास्कर को दंतेवाड़ा, कमलेश कुमार गोरकर को कोंडागांव, देवेंद्र भगत को सूरजपुर और गोपाल सिंह नेताम को जशपुर जिला न्यायालय में कोर्ट मैनेजर बनाया गया है।
आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भी भर्ती की गई है। इसके तहत 19 अभ्यर्थियों को भृत्य के पद पर नियुक्ति दी गई है। चयनित कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियुक्त कर्मचारियों के लिए परिवीक्षा अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। निर्धारित अवधि में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं होने पर परिवीक्षा को एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। स्थायी नियुक्ति होने तक कर्मचारी परिवीक्षा पर ही माने जाएंगे।
परिवीक्षा के दौरान सेवाएं बिना कारण बताए समाप्त की जा सकती हैं। कर्मचारी स्वयं सेवा छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें एक महीने की पूर्व सूचना देनी होगी अथवा उसके बदले एक माह का वेतन जमा करना होगा। नियोक्ता की ओर से सेवा समाप्त किए जाने की स्थिति में भी एक महीने की पूर्व सूचना या उसके बदले एक माह का वेतन देने का प्रावधान है।
चयनित कोर्ट मैनेजरों को 3 सितंबर 2026 तक अपने निर्धारित पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा। तय समय सीमा में जॉइनिंग नहीं करने और अतिरिक्त समय की अनुमति नहीं मिलने पर अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए अपात्र माना जा सकता है।
कार्यभार ग्रहण करते समय मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और सभी शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों की मूल प्रतियां प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। नियुक्त अभ्यर्थियों को पुलिस सत्यापन और आवश्यक प्रमाण पत्रों की जांच भी करानी होगी।
नियुक्ति को अनन्तिम यानी Provisional रखा गया है। जाति एवं जनजाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कोई गड़बड़ी पाए जाने पर नियुक्ति समाप्त की जा सकती है। इसके अलावा हाईकोर्ट में सेवा के दौरान बिना अनुमति किसी अन्य विभाग में सीधे आवेदन करने, बिना अनुमति किसी शैक्षणिक संस्थान में अध्ययन करने या स्वाध्यायी छात्र के रूप में परीक्षा देने पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
आरक्षित पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण करते समय निर्धारित प्रारूप में शपथ-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
यह नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित SLP (C) No. 19668/2022 तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में विचाराधीन WPS 4341/2026, WPS 4488/2026, WPS 4494/2026 और WPS 4758/2026 में पारित होने वाले अंतिम आदेशों के अधीन रहेंगी।
सभी नियुक्तियां छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय सेवाएं (नियुक्ति, सेवा की शर्तें तथा आचरण) नियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार होंगी।