त्योहारी खरीदारी से पहले बड़ा बदलाव, Amazon-Flipkart के नए नियम से वेंडर्स को झटका, कैंसिलेशन पर 1,600 रुपये तक जुर्माना

Amazon-Flipkart के नए नियम से वेंडर्स को झटका : त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ई-कॉमर्स कंपनियों Amazon और Flipkart ने अपने वेंडर्स के लिए नियम और सख्त कर दिए हैं। अब ऑर्डर कैंसिल करने या तय समय पर प्रोडक्ट शिप नहीं करने पर वेंडर्स को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। Amazon ने इसके साथ ही क्लोजिंग फीस में भी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
कंपनियों के मुताबिक, ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने के कारण फीस में बदलाव किया गया है। वहीं, बाजार के जानकारों का मानना है कि बढ़ी हुई लागत का असर आने वाले समय में प्रोडक्ट की कीमतों के जरिए ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है।
दरअसल, हर साल त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर्स की संख्या तेजी से बढ़ती है। इस दौरान ऑर्डर कैंसिल होने या डिलीवरी में देरी से ग्राहकों को परेशानी होती है और प्लेटफॉर्म पर उनका भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कंपनियां वेंडर्स को समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए ज्यादा जिम्मेदार बनाना चाहती हैं।
Amazon के नए नियमों के तहत महंगे ऑर्डर कैंसिल करने पर वेंडर्स को बड़ा जुर्माना देना पड़ सकता है। वहीं, तय समयसीमा में प्रोडक्ट शिप नहीं करने पर यह पेनल्टी 1,600 रुपए तक पहुंच सकती है।
जुर्माना मुख्य रूप से दो परिस्थितियों में लागू होगा। पहली स्थिति में वेंडर अपनी तरफ से ऑर्डर कैंसिल करता है। दूसरी स्थिति तब होगी, जब तय शिपिंग तारीख के 24 घंटे के भीतर वेंडर प्रोडक्ट भेजने और उसकी पुष्टि करने में असफल रहता है। ऐसी स्थिति में Amazon ऑर्डर को खुद कैंसिल कर सकता है, लेकिन इसका शुल्क वेंडर से ही वसूला जाएगा।
पेनल्टी की रकम ऑर्डर की कीमत के आधार पर तय होगी। उदाहरण के तौर पर 5,000 रुपए के ऑर्डर पर 10% की दर से करीब 500 रुपए का शुल्क लग सकता है। वहीं 20,000 रुपए के ऑर्डर पर 8% के हिसाब से जुर्माना 1,600 रुपए तक पहुंच सकता है।
इसका मतलब है कि ऑर्डर की कीमत जितनी ज्यादा होगी, वेंडर पर संभावित आर्थिक बोझ भी उतना ही बढ़ सकता है। खासतौर पर कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले छोटे वेंडर्स के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Flipkart ने भी डिलीवरी और ऑर्डर कैंसिलेशन को लेकर वेंडर्स के लिए नए पेनल्टी नियम लागू किए हैं। ये नियम कम से कम तीन महीने पुराने वेंडर्स पर लागू होंगे।
अगर वेंडर तय तारीख तक प्रोडक्ट को लॉजिस्टिक्स पार्टनर को नहीं सौंपता है, तो उसे 30 रुपए का शुल्क देना होगा। वहीं, ग्राहक से ऑर्डर मिलने के बाद वेंडर द्वारा ऑर्डर कैंसिल करने पर 60 रुपए तक की पेनल्टी लग सकती है।
इसके अलावा, तय शिपिंग समयसीमा निकलने के बाद ऑर्डर कैंसिल करने पर वेंडर को 90 रुपए तक का शुल्क देना पड़ सकता है।
एक वेंडर के मुताबिक, त्योहारी सीजन से पहले फीस में बदलाव होना कोई नई बात नहीं है। हालांकि, कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे वेंडर्स के लिए अतिरिक्त शुल्क परेशानी बढ़ा सकता है। पहले से ही बढ़ती लागत और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच इन वेंडर्स पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है।
Amazon 7 सितंबर से क्लोजिंग फीस में भी बदलाव करने जा रही है। 500 रुपए तक कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर क्लोजिंग फीस में 1 रुपए की बढ़ोतरी होगी। वहीं, 500 रुपए से ज्यादा कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर यह फीस 3 रुपए तक बढ़ाई जाएगी।
कंपनी ने फीस बढ़ाने के पीछे ईंधन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत को वजह बताया है। यह बदलाव Fulfillment Center, Easy Ship और Seller Flex के जरिए प्रोडक्ट बेचने वाले वेंडर्स पर लागू होगा।
हालांकि, फिलहाल यह बढ़ी हुई फीस सीधे ग्राहकों से नहीं ली जा रही है। लेकिन अगर वेंडर्स की लागत लगातार बढ़ती है, तो वे इसका कुछ हिस्सा प्रोडक्ट की कीमत में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में लंबे समय में इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की संभावना है।
नए नियमों का एक फायदा ग्राहकों को भी मिल सकता है। ऑर्डर कैंसिल करने या समय पर प्रोडक्ट शिप नहीं करने पर आर्थिक नुकसान होने के कारण वेंडर्स डिलीवरी को लेकर ज्यादा सतर्क रहेंगे। इससे समय पर ऑर्डर मिलने और कैंसिलेशन की समस्या कम होने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, अगर वेंडर्स की लागत बढ़ती है और वे इस अतिरिक्त खर्च को प्रोडक्ट की कीमत में शामिल करते हैं, तो कुछ सामान त्योहारी सीजन में महंगा हो सकता है।
कुल मिलाकर Amazon और Flipkart के नए नियमों का सीधा असर वेंडर्स के कारोबार पर पड़ेगा, जबकि आने वाले समय में इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों की खरीदारी की लागत पर भी दिखाई दे सकता है।