उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष को हाई कोर्ट का झटका, तय उम्र सीमा के बाद पद पर बने रहना नियमों के खिलाफ

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने कोरिया-बैकुंठपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रधान की पद पर बने रहने की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष या सदस्य की नियुक्ति अवधि और अधिकतम आयु सीमा कानून में निर्धारित है। महज आयोग के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के नाम पर 65 वर्ष की निर्धारित अधिकतम आयु के बाद किसी व्यक्ति को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रधान को 10 फरवरी 2022 को कोरिया-बैकुंठपुर जिला उपभोक्ता आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। नियुक्ति चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक के लिए थी। उन्होंने 10 मार्च 2026 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर ली।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू अथवा पूरी नहीं हुई है। इससे आयोग के कामकाज में प्रशासनिक शून्यता की स्थिति बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट के गणेश कुमार राजेश्वर राव सेलुकर बनाम महेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए फैसले का हवाला देते हुए नई नियुक्ति होने तक उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति देने की मांग की थी।

राज्य सरकार ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण (राज्य आयोग और जिला आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें) नियम, 2020 के नियम 10 में स्पष्ट है कि अध्यक्ष या सदस्य चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक ही पद पर रह सकता है।

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 10 मार्च 2026 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। नियमों में निर्धारित अधिकतम आयु के बाद पद पर बने रहना स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के विपरीत होगा। कोर्ट ने कहा कि किसी संस्था के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए, वैधानिक रूप से निर्धारित कार्यकाल और अधिकतम आयु सीमा को नजरअंदाज नहीं कर सकते।