सिंधु जल संधि पर PCA का फैसला, भारत ने किया खारिज; कहा- परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा कोई असर

सिंधु जल संधि : नीदरलैंड्स के द हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ हुई संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करना होगा। हालांकि, भारत ने फैसले को खारिज करते हुए कहा है कि वह PCA के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता और इसके फैसले का उसकी पनबिजली परियोजनाओं या संधि को निलंबित रखने के निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने हमले में शामिल तीन आतंकियों में से दो को पाकिस्तानी नागरिक बताया था। पाकिस्तान ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया था।
PCA ने कहा कि सिंधु जल संधि अभी भी प्रभावी है और भारत के पास इसे एकतरफा निलंबित या समाप्त करने का पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने भारत को पश्चिमी नदियों पर अपनी पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन और संचालन में संधि के प्रावधानों का पालन करने को कहा।
पाकिस्तान की मांग पर कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भारत रतले पनबिजली परियोजना की बांध की दीवार और पावर इनटेक संरचना को निर्धारित स्तर से ऊपर नहीं बना सकता। यह स्थिति विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ के फैसले के 90 दिनों तक लागू रहेगी। तटस्थ विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक यह तय करेगा कि भारत की परियोजनाएं संधि के अनुरूप हैं या नहीं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कथित PCA के पास भारत के संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, वर्तमान या भविष्य में इस न्यायाधिकरण के फैसलों का भारत की परियोजनाओं से जुड़ी कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत का तर्क है कि पाकिस्तान ने संधि में बदलाव के लिए द्विपक्षीय बातचीत में शामिल होने से इनकार किया और तीसरे पक्ष के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की। भारत पहले ही PCA की कार्यवाही का बहिष्कार कर चुका है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान के इस रुख की पुष्टि हुई है कि किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा न तो निलंबित किया जा सकता है और न ही समाप्त किया जा सकता।
पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने भी इसे पाकिस्तान की बड़ी जीत बताया।
क्या है सिंधु जल संधि?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत का मुख्य अधिकार है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब पश्चिमी नदियां पाकिस्तान के हिस्से में आती हैं। हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों पर कुछ शर्तों के साथ पनबिजली परियोजनाएं बनाने की अनुमति है।
भारत और पाकिस्तान ने तीन युद्धों और लंबे तनाव के बावजूद दशकों तक इस संधि का पालन किया है। अब भारत के संधि निलंबन और PCA के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद और गहरा सकता है।
भारत का कहना है कि PCA के पास अपने फैसले लागू कराने का स्वतंत्र तंत्र नहीं है। ऐसे में भारत द्वारा फैसले को स्वीकार नहीं करने की स्थिति में इसका जमीन पर व्यावहारिक असर सीमित रह सकता है।