CGPSC कथित घोटाला: तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, नियमित जमानत मंजूर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित घोटाले से जुड़े मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को उन्हें नियमित जमानत देने का आदेश दिया। उनके साथ तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को भी नियमित जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की।
सुप्रीम कोर्ट में आरती वासनिक की ओर से दलील दी गई कि वह एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं और जांच एजेंसी इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि मुकदमे में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज होने हैं और सुनवाई में हो रही देरी के लिए आरती वासनिक जिम्मेदार नहीं हैं। अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण भी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है।
बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि CBI की ओर से आरती वासनिक पर कथित घोटाले में किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। साथ ही, मामले में कथित तौर पर लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगी हुई है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरती वासनिक और ललित गनवीर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच CGPSC में हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप लगाया गया था कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता के नियमों का पालन नहीं किया गया और राजनीतिक तथा प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली परिवारों से जुड़े कुछ अभ्यर्थियों का चयन उच्च पदों के लिए किया गया।
आरोपों में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य राजपत्रित पदों पर चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंपी थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए।
CGPSC नियुक्तियों को लेकर विधायक ननकी राम कंवर की ओर से दायर याचिका में कई चयनित अभ्यर्थियों के राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली लोगों से रिश्तों का उल्लेख किया गया था। याचिका के जरिए इन नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
याचिका में जिन अभ्यर्थियों और उनके कथित रिश्तों का उल्लेख किया गया, उनमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, जिला आबकारी अधिकारी और लेबर ऑफिसर जैसे पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।
हालांकि, किसी अभ्यर्थी का किसी अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति से रिश्तेदार होना अपने आप में चयन प्रक्रिया में अनियमितता या गड़बड़ी साबित नहीं करता। इन रिश्तों का उल्लेख याचिका में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों के संदर्भ में किया गया था।
CGPSC परीक्षा-2021 के तहत 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई थी, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए थे।
इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 509 अभ्यर्थी सफल हुए। इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी।