छत्तीसगढ़ के 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती, हाईकोर्ट ने कहा- गंभीर संवैधानिक मामला

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई फिलहाल टल गई है। मामला मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। याचिकाकर्ता वासु चक्रवर्ती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी ने कोर्ट में पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जा सकता और मामले की विस्तृत सुनवाई जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया।

याचिका में छत्तीसगढ़ में 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। अब अगली सुनवाई में अदालत इस मामले से जुड़े संवैधानिक पहलुओं और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगी।

छत्तीसगढ़ में 14 मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस पहले भी सवाल उठा चुकी है। कांग्रेस ने इसे संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताते हुए कहा था कि 2003 में लागू व्यवस्था के तहत किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। ऐसे में 15 प्रतिशत के हिसाब से संख्या 13.5 बनती है, जिसे व्यावहारिक रूप से मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 14 मंत्रियों के रूप में माना गया था।

कांग्रेस का यह भी कहना था कि उसकी सरकार के दौरान मंत्रियों की संख्या 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान 14 मंत्रियों को शामिल किए जाने के बाद इस मुद्दे पर संवैधानिक विवाद खड़ा हुआ। इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

अब करीब एक साल पुराने इस विवाद पर हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई में मामले की सुनवाई नए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच में होने की संभावना भी जताई जा रही है।