3 निगम-मंडल पदाधिकारियों को राज्य मंत्री का दर्जा, प्रोटोकॉल और शिष्टाचार तक सीमित रहेंगी सुविधाएं

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन निगम-मंडल और प्राधिकरण से जुड़े पदाधिकारियों को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में 2 सितंबर को आदेश जारी किया। यह दर्जा संबंधित पदों पर रहते हुए शिष्टाचार और प्रोटोकॉल के तहत लागू होगा।

सरकारी आदेश के मुताबिक संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। वहीं अजय शुक्ला को छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में यह दर्जा मिला है।

इसके अलावा शरद अवस्थी को इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। तीनों पदाधिकारियों के लिए यह व्यवस्था आदेश जारी होने की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी।

सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य मंत्री का दर्जा केवल शिष्टाचार और प्रोटोकॉल संबंधी उद्देश्यों के लिए दिया गया है। इससे संबंधित पदाधिकारियों को मंत्री के समान संवैधानिक या प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं होंगे।

आदेश के अनुसार, इन पदाधिकारियों को मिलने वाली सुविधाएं संबंधित विभाग, आयोग या संस्था के नियमों के आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी। सुविधाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग की होगी।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि राज्य मंत्री का दर्जा मिलने से पदाधिकारियों की किसी प्रकार की वरिष्ठता या प्रोटोकॉल क्रम निर्धारित नहीं होगा। यह निर्णय मुख्य रूप से पद की गरिमा बनाए रखने और सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल व्यवस्था के उद्देश्य से लिया गया है।

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