NTPC कोरबा की सातों यूनिट एक साथ ट्रिप, 2600 MW बिजली उत्पादन शून्य; मचा हड़कंप

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) संयंत्र में शुक्रवार शाम अचानक बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो गया। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) की ओर से किए जा रहे नियमित परीक्षण के दौरान स्विच यार्ड में गंभीर विद्युत फॉल्ट आ गया। इसके बाद संयंत्र की सभी सात इकाइयां एक साथ ट्रिप हो गईं। 2600 मेगावाट क्षमता वाले इस पावर प्लांट में एक साथ उत्पादन ठप होने से बिजली व्यवस्था को लेकर अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम पीजीसीआईएल की तकनीकी टीम स्विच यार्ड में सर्किट ब्रेकर की नियमित टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक इलेक्ट्रिकल फॉल्ट हुआ। फॉल्ट का पता चलते ही सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई और सर्किट ब्रेकर ऑटोमैटिक प्रोटेक्शन मोड में चले गए।

सुरक्षा रिले से ट्रिप कमांड मिलने के बाद सिस्टम का संपर्क डिस्कनेक्ट हो गया। इसका असर संयंत्र की सभी इकाइयों पर पड़ा और देखते ही देखते सातों यूनिट बंद हो गईं।

एनटीपीसी कोरबा संयंत्र में 500-500 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां और 200-200 मेगावाट क्षमता की तीन इकाइयां संचालित होती हैं। इन सभी की कुल उत्पादन क्षमता 2600 मेगावाट है। सातों यूनिट के एक साथ ट्रिप होने से संयंत्र का उत्पादन अचानक शून्य हो गया।

घटना के बाद एनटीपीसी के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ तत्काल सक्रिय हो गए। टीम ने फॉल्ट के कारणों की जांच शुरू करने के साथ ही संयंत्र को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।

कोरबा संयंत्र से पैदा होने वाली बिजली छत्तीसगढ़ के अलावा पश्चिमी और मध्य भारत के कई राज्यों को सप्लाई की जाती है। ऐसे में संयंत्र की सभी इकाइयों के बंद होने से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव की बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।

इतनी बड़ी क्षमता के उत्पादन के अचानक बंद होने से क्षेत्रीय पावर ग्रिड पर भी दबाव की स्थिति बन सकती थी। हालांकि, आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक ग्रिड प्रबंधन का सहारा लिया गया।

एनटीपीसी प्रबंधन के अनुसार, घटना से संयंत्र में बिजली उत्पादन जरूर प्रभावित हुआ है, लेकिन उपभोक्ताओं को होने वाली मुख्य बिजली आपूर्ति को वैकल्पिक ग्रिड व्यवस्था के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सभी सात इकाइयों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा सिंक्रोनाइज करने में जुटी है। अधिकारियों के मुताबिक, यूनिट्स को सुरक्षित तरीके से री-स्टार्ट करने के बाद उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाया जाएगा।

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