55 से ज्यादा कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा, आज इंद्रावती भवन में प्रदर्शन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश के 55 से अधिक कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। ‘एक मांग-एक मंच अभियान’ के तहत 11 सितंबर को इंद्रावती भवन में सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की ओर से मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
इस आंदोलन में नियमित कर्मचारियों के साथ अनियमित कर्मचारी और पेंशनर्स भी शामिल होंगे। दोपहर के भोजनावकाश के दौरान इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 पर कर्मचारी सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार को स्पष्ट संदेश देने की शुरुआत है।
‘एक मांग-एक मंच अभियान’ का नेतृत्व छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया, छत्तीसगढ़ कोषालयीन कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ठाकुर और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू कर रहे हैं। संगठन पदाधिकारियों के मुताबिक, 55 से अधिक कर्मचारी संघ अभियान के समर्थन में हैं।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले जारी ‘छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023’ में कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई वादे किए गए थे। अब कर्मचारी संगठन इन वादों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि मांगों के समाधान में देरी के कारण कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता (DA) देने के साथ 86 महीने के बकाया एरियर्स का भुगतान शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस राशि का कर्मचारियों को इंतजार है और सरकार को जल्द इसका भुगतान करना चाहिए।
आंदोलन में अनियमित कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। संगठनों ने अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, सेवा से बाहर किए गए कर्मचारियों की बहाली और कम मानदेय पाने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालिक करने तथा आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
नगरीय निकायों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग भी की गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग में लैब और फार्मेसी से संबंधित ठेका व्यवस्था खत्म करने की मांग रखी गई है। कर्मचारी और पेंशनर्स मध्यप्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने की भी मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, 11 सितंबर का सांकेतिक प्रदर्शन सरकार को उनकी मांगों को लेकर पहला स्पष्ट संदेश है। प्रदर्शन के बाद मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत शुरू करती है या आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाती है।