सर्पदंश मुआवजा घोटाला: फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आरोपों में घिरीं डॉ. प्रियंका सोनी को राहत, हाईकोर्ट ने दी स्थायी जमानत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाला मामले में आरोपी डॉ. प्रियंका सोनी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने डॉ. प्रियंका सोनी को स्थायी जमानत दे दी। उन पर सर्पदंश से हुई मौत से जुड़े तीन मामलों में कथित रूप से गलत या फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप हैं।

डॉ. प्रियंका सोनी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष कई महत्वपूर्ण दलीलें रखीं। बचाव पक्ष ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करना विशेषज्ञ चिकित्सक का कार्य है। किसी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को गलत या फर्जी साबित करने के लिए विशेषज्ञ स्तर की जांच के साथ विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट जरूरी होती है।

अधिवक्ता का तर्क था कि इस मामले में ऐसी किसी विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के बिना ही डॉक्टर को आरोपी बनाया गया। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विशेषज्ञ स्तर पर जांच कर उसे अमान्य या गलत ठहराने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद डॉ. प्रियंका सोनी को स्थायी जमानत प्रदान कर दी।

पुलिस जांच के दौरान सर्पदंश से मौत के नाम पर दिए जाने वाले सरकारी मुआवजे से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक कथित संगठित गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई, जो सर्पदंश से मौत के नाम पर सरकारी मुआवजा हासिल करने की कोशिश करता था।

पुलिस के अनुसार, SIMS में सर्पदंश से मौत का कोई मामला सामने आने के बाद कथित गिरोह से जुड़े लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचती थी। इसके बाद मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा योजना की जानकारी दी जाती और मुआवजा हासिल करने के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी।

पुलिस जांच में कुछ मामलों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि बीमारी से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत के रूप में दर्शाने के लिए शव पर कथित तौर पर सांप के काटने जैसे निशान बनाए गए। इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग पंचनामा और पटवारी प्रतिवेदन समेत अन्य दस्तावेज तैयार कर मुआवजा प्रकरण को आगे बढ़ाया गया।

जांच की आंच तहसील कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों तक भी पहुंची है। पुलिस का दावा है कि कुछ मामलों में चिकित्सकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, रतनपुर थाने में दर्ज एक मामले की जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर उसकी मौत को सर्पदंश से हुई बताकर सरकारी मुआवजा लेने का प्रयास किया गया।

इसी तरह कोनी थाना क्षेत्र में दर्ज तीन मामलों से जुड़े दस्तावेजों की जांच के दौरान भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात पुलिस ने कही है।

सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक 15 अलग-अलग प्रकरणों में FIR दर्ज की जा चुकी है। जांच एजेंसियां कथित गिरोह से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और मुआवजा प्रकरणों में शामिल अन्य भूमिकाओं की पड़ताल कर रही हैं।

डॉ. प्रियंका सोनी को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत का यह आदेश मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोर्ट के निर्णय के रूप में नहीं माना जा सकता।