कफ सिरप के नाम पर नशे का कारोबार, 5 दोषियों को 15-15 साल का सश्रम कारावास

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई हुई है। रायपुर और दुर्ग तक नशीली कफ सिरप पहुंचाने और उसकी बिक्री में शामिल पांच आरोपियों को विशेष NDPS कोर्ट ने 15-15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मामला 100 शीशी नशीली कफ सिरप की बरामदगी से शुरू हुआ था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर इसकी सप्लाई चेन मेडिकल स्टोर तक पहुंच गई।

25 अगस्त 2025 को कबीर नगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए TUSCOREX SYRUP की 100 शीशियां बरामद की थीं। प्रत्येक शीशी 100 एमएल की थी, यानी कुल 10 लीटर सिरप जब्त की गई थी। इसकी कीमत करीब 25 हजार रुपए बताई गई। मामले में पुलिस ने राहुल बंजारे और नंदन मिश्रा को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सुरेंद्र सिंह का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने सिरप की सप्लाई से जुड़ी कड़ियों को खंगाला। पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की जांच भिलाई के मॉडल टाउन स्थित अधिराज मेडिकल तक पहुंची। यहां मेडिकल संचालक उदित शर्मा और सह-संचालक सूजा कुरैशी उर्फ सन्नी की भूमिका सामने आई। इसके बाद दोनों को भी मामले में आरोपी बनाया गया और गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि नशीली सिरप कहां से आई, किसने खरीदी और उसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया। जांच के दौरान पांचों आरोपियों के बीच सप्लाई की कड़ियों को जोड़ते हुए पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए। वैज्ञानिक जांच के साथ दस्तावेजी और अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी केस में पेश किए गए।

पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए अपराध दर्ज होने के करीब चार महीने बाद 19 दिसंबर 2025 को कोर्ट में चालान पेश कर दिया। इसके बाद गवाहों की पेशी और समन-वारंट की प्रक्रिया में तेजी रखी गई। नतीजतन चालान पेश होने के 265 दिन के भीतर ही मामले की सुनवाई पूरी हो गई।

10 सितंबर 2026 को विशेष NDPS कोर्ट, रायपुर में न्यायाधीश किरण थवाईत ने मामले में पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने राहुल बंजारे, नंदन मिश्रा, सुरेंद्र सिंह, उदित शर्मा और सूजा कुरैशी उर्फ सन्नी को 15-15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।

इस मामले में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार भी उल्लेखनीय रही। अपराध दर्ज होने के 381 दिन के भीतर ही पांचों आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुना दी गई। जिस केस की शुरुआत 100 शीशी नशीली कफ सिरप की बरामदगी से हुई थी, उसकी जांच आगे बढ़ते-बढ़ते मेडिकल स्टोर तक पहुंची और अंत में पांच आरोपियों को लंबी जेल की सजा हुई।

इस कार्रवाई के बाद दवाओं की सप्लाई और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर नशीली कफ सिरप मेडिकल स्टोर की सप्लाई चेन तक कैसे पहुंची? क्या प्रदेश में दवाओं की बिक्री और वितरण की निगरानी पर्याप्त सख्त है? एक मामले में पूरी सप्लाई चेन सामने आने के बाद अब यह सवाल भी अहम हो गया है कि कहीं दूसरे इलाकों में भी दवाओं की आड़ में नशे का कारोबार तो नहीं चल रहा।