धुएं के चुभते अंधेरे से स्वाभिमान की रोशनी तक, शारदा बाई के जीवन को रोशन कर रही उज्ज्वला योजना

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रायपुर। रसोई के धुएं से लाल होती आंखें, चूल्हा फूंकते-फूंकते घुटती सांसें और रोजाना जंगल-बाजार से लकड़ी व उपले जुटाने की थका देने वाली जद्दोजहद… सारंगढ़ के रंजर पारा की रहने वाली श्रीमती शारदा बाई सारथी का जीवन लंबे समय तक इन्हीं मुश्किलों के बीच गुजरता रहा। लेकिन आज उनकी रसोई का नजारा पूरी तरह बदल चुका है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मिले एलपीजी गैस कनेक्शन ने न केवल उनके घर की रसोई से जहरीला धुआं बेदखल किया है, बल्कि उनके जीवन में सुविधा, सेहत और समय की बचत की एक नई सुबह भी लाई है।

*​पारंपरिक चूल्हे का दर्द और संघर्ष की डगर*

अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाली शारदा बाई का चार सदस्यों का परिवार आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। सीमित संसाधनों में परिवार के लिए समय पर खाना बनाना आसान नहीं था। पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाते समय उठने वाला धुआं आंखों और फेफड़ों के लिए लगातार खतरा बना रहता था। इसके साथ ही, लकड़ी और उपले एकत्र करने में हर दिन उनका काफी समय और शारीरिक श्रम बर्बाद हो जाता था।

*​उज्ज्वला योजना बनी संबल, बदली रसोई की तस्वीर*

शारदा बाई के इस दैनिक संघर्ष को खत्म किया प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने। योजना के तहत उन्हें मुफ्त एलपीजी कनेक्शन के साथ गैस चूल्हा और पहला भरा हुआ सिलेंडर प्राप्त हुआ। अब धुएं वाले चूल्हे की जगह नीली लौ ने ले ली है। खाना पकाना अब न केवल त्वरित और आसान हो गया है, बल्कि रसोई का वातावरण भी पूरी तरह स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद बन गया है।

*​खाते में सब्सिडी से मिली आर्थिक राहत*

गैस रिफिल कराने में भी योजना शारदा बाई के परिवार का संबल बनी हुई है। योजना के अंतर्गत 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 367 रुपए की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इस वित्तीय मदद से परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और वे आसानी से नियमित रिफिल करा पा रहे हैं।

*​सेवा संकल्प अभियान: बदलाव की एक प्रत्यक्ष मिसाल*

राज्य सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आ रही बदलाव की प्रेरक कहानियों में शारदा बाई का यह सफर एक बेहतरीन मिसाल है। यह कहानी दर्शाती है कि जब कोई जन-कल्याणकारी योजना किसी साधारण परिवार की बुनियादी जरूरतों से सीधे जुड़ती है, तो वह केवल ईंधन नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार की जीवनशैली और स्वास्थ्य का कायाकल्प कर देती है। धुएं से स्वच्छ रसोई तक का शारदा बाई का यह सफर सशक्त और सुविधाजनक छत्तीसगढ़ की एक जीवंत तस्वीर पेश करता है।