बिलासपुर हाईकोर्ट की तलाक आदेश पर अंतरिम रोक, महिला का वैवाहिक दर्जा फिलहाल बरकरार

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर बेंच ने तलाक से जुड़े एक मामले में उज़मा बानो को अंतरिम राहत दी है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने रायपुर के टिकरापारा स्थित इदारा-ए-शरिया दारुल कज़ा की ओर से जारी तलाक के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता उज़मा बानो का उनके पति रज़ा रहमान के साथ वैवाहिक दर्जा अंतरिम तौर पर कायम रहेगा। साथ ही दारुल कज़ा और पति को तलाक के संबंध में आगे कोई कार्रवाई करने से रोक दिया गया है।

उज़मा बानो, जो बिलासपुर के तालापारा स्थित तैयबा चौक की निवासी हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दारुल कज़ा से जारी दूसरे तलाक के आदेश को चुनौती दी थी। मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग, बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों, दारुल कज़ा तथा पति रज़ा रहमान को पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी और अधिवक्ता महिमा चंद्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि तलाक से संबंधित दस्तावेज पर इदारा-ए-शरिया दारुल कज़ा की मुहर है। अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि देश के कानून में समानांतर अथवा इस्लामिक अदालत के गठन का कोई प्रावधान नहीं है।

पक्षकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के बेनज़ीर हीना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का भी उल्लेख किया गया। इसमें तलाक-ए-हसन से संबंधित कार्यवाही के दौरान वैवाहिक दर्जा बनाए रखने को लेकर दिए गए अंतरिम आदेश का संदर्भ रखा गया।

मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। दस्तावेजों और पूर्व न्यायिक फैसलों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रथमदृष्टया टिप्पणी की कि महिला के खिलाफ इस्लामिक कोर्ट की ओर से दूसरा तलाक जारी किया गया है और प्रथमदृष्टया यह आदेश कानूनी रूप से उचित प्रतीत नहीं होता।

अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत उज़मा बानो का अपने पति के साथ वैवाहिक दर्जा फिलहाल बरकरार रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही दारुल कज़ा और पति को तलाक से जुड़ी आगे की किसी भी कार्रवाई से रोक दिया गया है।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तारीख तय करने का निर्देश दिया है।