सेवा संकल्प अभियान : सेवा संकल्प से कुपोषण पर जीत, 16 सप्ताह में मिनाक्षी ने पाई सामान्य पोषण स्थिति

पोषण, परामर्श और सतत निगरानी से बदली तस्वीर, स्वस्थ बचपन की ओर बढ़ी मिनाक्षी
रायपुर। हर बच्चे का स्वस्थ बचपन, मजबूत भविष्य की पहली सीढ़ी है। इसी सोच के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए जिले में कुपोषित बच्चों की पहचान से लेकर उनके पोषण सुधार तक निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
‘हमर स्वस्थ लइका’ कार्यक्रम के माध्यम से नियमित वृद्धि निगरानी, पोषण सहयोग, परिवार परामर्श एवं सतत फॉलो-अप के जरिए बच्चों को स्वस्थ पोषण स्थिति की ओर लाया जा रहा है। इसी जनकल्याणकारी प्रयास का प्रेरणादायक उदाहरण है मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले ग्राम विकासखंड मोहला के ग्राम मुंजाल निवासी मिनाक्षी केशरी पिस्दा, जिसने गंभीर कुपोषण से जूझते हुए निरंतर देखभाल और पोषण सहयोग के माध्यम से महज 16 सप्ताह में सामान्य पोषण स्थिति हासिल की।
मिनाक्षी केशरी पिस्दा का जन्म 16 मार्च 2022 को हुआ। उसे 05 मई 2026 को “हमर स्वस्थ लइका” कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत किया गया। नियमित वृद्धि निगरानी के दौरान उसका वजन 10 किलोग्राम एवं लंबाई 91.5 सेंटीमीटर दर्ज की गई। पोषण स्थिति के आकलन में मिनाक्षी को गंभीर तीव्र कुपोषित पाया गया। समय पर हुई इस पहचान ने उसके पोषण सुधार एवं स्वस्थ विकास की दिशा में आवश्यक हस्तक्षेप की शुरुआत की।
मिनाक्षी को कार्यक्रम के अंतर्गत नियमित देखभाल एवं फॉलो-अप में शामिल करते हुए उसकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संवर्धित घर ले जाने योग्य पोषण आहार (एटीएचआर) प्रदान किया गया। परिवार को इसके उचित उपयोग, सेवन की विधि तथा बच्चे को पर्याप्त एवं पौष्टिक आहार देने के संबंध में आवश्यक परामर्श दिया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा नियमित गृहभेंट, वृद्धि की निगरानी, परिवार को पोषण संबंधी मार्गदर्शन और सतत फॉलो-अप सुनिश्चित किया गया। परिवार की सहभागिता और विभागीय प्रयासों के समन्वय से मिनाक्षी की पोषण सुधार आगे बढ़ती रही।
लगातार 16 सप्ताह तक पोषण देखभाल, संवर्धित पोषण आहार, नियमित वृद्धि निगरानी एवं सतत फॉलो-अप का सकारात्मक परिणाम सामने आया। पंजीयन के समय 10.0 किलोग्राम वजन वाली मिनाक्षी का वजन 16 सप्ताह बाद बढ़कर 11.6 किलोग्राम हो गया, अर्थात उसके वजन में 1.6 किलोग्राम की वृद्धि हुई। इसी अवधि में उसकी लंबाई 91.5 सेंटीमीटर से बढ़कर 93.3 सेंटीमीटर हो गई। निरंतर पोषण देखभाल एवं निगरानी के बाद उसकी पोषण स्थिति गंभीर तीव्र कुपोषण से सामान्य पोषण स्थिति में आ गई।
मिनाक्षी की यह उपलब्धि इस बात का सकारात्मक उदाहरण है कि कुपोषण की समय पर पहचान, उचित पोषण हस्तक्षेप, परिवार आधारित देखभाल, नियमित वृद्धि निगरानी और सतत फॉलो-अप के माध्यम से बच्चों के पोषण एवं विकास में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सेवा और संकल्प के माध्यम से अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता मिनाक्षी जैसे बच्चों के जीवन में प्रत्यक्ष परिवर्तन के रूप में दिखाई देती है। गंभीर कुपोषण से सामान्य पोषण स्थिति तक मिनाक्षी का सफर केवल उसके स्वस्थ होने की कहानी नहीं, बल्कि सेवा, सुशासन और जनकल्याण के समन्वित प्रयासों से स्वस्थ बचपन की दिशा में बढ़ते कदम की प्रेरणादायक मिसाल है।