पैकेज्ड फूड पर अब सामने दिखेगी ‘लाल चेतावनी’! ज्यादा चीनी, नमक और फैट की मिलेगी जानकारी
Sandhya 25/09/2026

नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में उत्पादों की पोषण संबंधी जानकारी समझना आसान हो सकता है। चिप्स, बिस्किट, स्नैक्स, ड्रिंक और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने ही यह जानकारी देने का प्रस्ताव है कि उनमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक है या नहीं।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष Front-of-Pack Nutrition Labelling (FoPL) का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अधिक मात्रा में मौजूद पोषक तत्वों के लिए पैकेट के सामने लाल रंग के हेक्सागन के जरिए चेतावनी देने की योजना बताई गई है। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ताओं को पैकेट के पीछे दी गई न्यूट्रिशन टेबल पढ़े बिना भी महत्वपूर्ण जानकारी आसानी से मिल सके।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पैकेजिंग के फ्रंट पर जरूरत के अनुसार HIGH SUGAR, HIGH SALT और HIGH FAT जैसी चेतावनियां दी जा सकती हैं। इन्हें पैकेट के प्रमुख हिस्से में रखने का प्रस्ताव है। यदि किसी खाद्य उत्पाद में एक से अधिक पोषक तत्व निर्धारित सीमा से ज्यादा पाए जाते हैं, तो एक ही फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी में संबंधित जानकारियां शामिल की जा सकती हैं।
FSSAI के प्रस्ताव में चेतावनी के फॉन्ट को पीछे दी जाने वाली न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन टेबल के फॉन्ट से कम से कम एक पॉइंट बड़ा रखने की बात भी कही गई है।
FSSAI के शुरुआती प्रस्ताव में निर्धारित सीमा से अधिक दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व वाले उत्पादों को प्राथमिक चरण में शामिल करने की बात थी। बाद में पूरी व्यवस्था को एक ही चरण में लागू करने की तैयारी बताई गई।
इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इसके वैज्ञानिक आधार और चरणबद्ध तरीके सहित कई पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। पोषक तत्वों की सीमा तय करने के लिए FSSAI ने Dietary Guidelines for Indians, 2024 को आधार बनाया है। हालांकि प्रस्तावित सीमा और लेबलिंग व्यवस्था पर अभी कानूनी एवं तकनीकी प्रक्रिया जारी है, इसलिए इसे फिलहाल अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।
प्रस्तावित लाल हेक्सागन को पैकेज पर मौजूद अन्य अनिवार्य संकेतों से अलग पहचान देने की योजना है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके डिजाइन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने यह जानना चाहा है कि लाल रंग भारतीय उपभोक्ताओं के बीच नॉन-वेज संकेत से जुड़ा होने के कारण कहीं भ्रम की स्थिति तो पैदा नहीं करेगा।
इसके अलावा अलग-अलग पोषक तत्वों के लिए अलग-अलग प्रतीक जरूरी हैं या एक संयुक्त हेक्सागन से काम चल सकता है, इस पर भी विचार किया जा रहा है। अंतिम नियमों में लेबल के आकार, स्थान, खाद्य श्रेणियों और मानकों में बदलाव संभव है।
FSSAI के प्रस्ताव में Highly Sweetened Beverage जैसी श्रेणी को भी फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी व्यवस्था में शामिल करने की बात सामने आई है। यानी ज्यादा मीठे पेय पदार्थों पर भी पैकेज के सामने स्पष्ट जानकारी देने की व्यवस्था हो सकती है।
हालांकि यह व्यवस्था तत्काल लागू नहीं होने जा रही है। प्रस्ताव और ड्राफ्ट प्रक्रिया पूरी होने के बाद हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद नियमों में संशोधन और अधिसूचना की प्रक्रिया होगी।
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अंतिम नियम मंजूर होने के बाद खाद्य कारोबारियों को नई लेबलिंग व्यवस्था अपनाने के लिए 365 दिन तक का समय दिया जा सकता है। इसलिए फिलहाल यह एक प्रस्तावित व्यवस्था है और अंतिम नियम आने के बाद ही इसकी वास्तविक रूपरेखा स्पष्ट होगी।