540 करोड़ के कोल लेवी केस में बड़ा अपडेट, EOW आज पेश करेगी अंतिम चार्जशीट, देवेंद्र यादव समेत 9 आरोपियों को समन

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) आज विशेष अदालत में अंतिम चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। मामले में 9 आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को भी 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे रायपुर की विशेष अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।

यह मामला करीब 540 करोड़ रुपए की कथित अवैध वसूली से जुड़ा है। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे मामले में नेताओं को करीब 65 करोड़ रुपए और अधिकारियों को 36 करोड़ रुपए से अधिक की रकम पहुंचाई गई। जांच के दौरान करीब 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।

चार्जशीट के अनुसार कारोबारी सूर्यकांत तिवारी इस कथित कोल लेवी सिंडिकेट का मुख्य व्यक्ति था। आरोप है कि कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से अवैध तरीके से रकम वसूली जाती थी।

आरोप के मुताबिक कोल वाशरी से निकलने वाले कोयले पर 100 रुपए प्रति टन और कोयले की ट्रांसपोर्टिंग पर अतिरिक्त 25 रुपए प्रति टन वसूले जाते थे। कोरबा और रायगढ़ में इस वसूली के लिए अलग-अलग कार्यालय बनाए गए थे।

कारोबारियों को कथित तौर पर सूर्यकांत को दो स्तर पर कमीशन देना पड़ता था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि वसूली की रकम सूर्यकांत तिवारी के कर्मचारी नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचाते थे। इसमें निखिल चंद्राकर की प्रमुख भूमिका बताई गई है।

चार्जशीट के मुताबिक सूर्यकांत की डायरी में 80 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन का हिसाब मिला है। एजेंसी ने दावा किया है कि इस रकम का एक हिस्सा नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

ED की चार्जशीट में 8 नेताओं और अधिकारियों को कथित तौर पर बड़े लाभार्थियों के रूप में बताया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल प्रॉपर्टी खरीदने, गहने लेने और चुनाव में खर्च करने के लिए किया गया।

चार्जशीट के मुताबिक सौम्या चौरसिया को 169 बार में करीब 31 करोड़ रुपए मिलने का दावा किया गया है। निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू पर 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। वहीं IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य पर भी प्रॉपर्टी में करोड़ों रुपए खर्च करने का आरोप लगाया गया है।

चार्जशीट में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव पर 11 बार में करीब 3 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश चुनाव में किया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच सीधे संपर्क थे और दोनों के बीच WhatsApp पर बातचीत भी हुई थी। चार्जशीट में कथित चैट के स्क्रीनशॉट भी शामिल किए गए हैं।

एक बातचीत में देवेंद्र यादव के शंकर नगर पहुंचने और खैरागढ़ जाने को लेकर बात होने का दावा किया गया है। सूर्यकांत तिवारी की ओर से बाद में मिलने का समय बताया गया और बातचीत के अंत में ‘DONE’ लिखे जाने का उल्लेख है।

पूर्व कांग्रेस विधायक चंद्रदेव राय पर दो बार में करीब 46 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी के मुताबिक इसमें से 42 लाख रुपए उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए गए, जबकि करीब 4 लाख रुपए से उनकी पत्नी के लिए 60 ग्राम सोने का हार खरीदा गया।

चार्जशीट में एक कथित बातचीत का भी जिक्र है, जिसमें सोने के हार की खरीद को लेकर चर्चा होने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार हार की कीमत करीब 4.30 लाख रुपए थी।

कांग्रेस नेता विनोद तिवारी पर कथित कोल लेवी सिंडिकेट से 19 किश्तों में करीब 1.87 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ चुनाव और प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया।

वहीं आरपी सिंह पर करीब 2 करोड़ 1 लाख 40 हजार रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। EOW के अनुसार पूछताछ के दौरान उन्होंने रकम लेने की बात स्वीकार की। एजेंसी का दावा है कि इस पैसे का इस्तेमाल गाड़ियों और मीडिया से जुड़े इंतजाम में किया गया।

जांच में करीब 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त किए जाने का दावा किया गया है। बेनामी संपत्ति का मतलब ऐसी संपत्ति से है, जिसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर खरीदा गया हो, जबकि उसका वास्तविक मालिक कोई और हो।

EOW अब जांच में जुटाए गए दस्तावेजों, चैट, लेन-देन और अन्य सबूतों के आधार पर अंतिम चार्जशीट विशेष अदालत में पेश करेगी। मामले में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं और इनका अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।