समंस भेजने की प्रक्रिया होगी तेज, अब डिजिटल माध्यम से भेजे जाएंगे समंस, डिलीवरी से लेकर रिकॉर्ड तक सब होगा डिजिटल

09_12_2022-court_demo

दुर्ग। न्यायालयों में समंस भेजने की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय ने पहल शुरू की है। इसके तहत जिला न्यायालय के सभी कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य समंस तैयार करने से लेकर संबंधित पक्षकार या गवाह तक उसकी इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी और डिलीवरी स्टेटस की निगरानी को डिजिटल बनाना है।

यह प्रशिक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। वहीं द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत पाराशर के मार्गदर्शन में व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी रवि कुमार महोबिया ने कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस तैयार करने, संबंधित पक्षकार अथवा गवाह को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने और उसकी डिलीवरी की स्थिति ऑनलाइन देखने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके अलावा डिजिटल डिलीवरी रिपोर्ट प्राप्त करने और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के तरीके भी बताए गए।

नई व्यवस्था से समंस की सेवा से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज और ट्रैक किया जा सकेगा। इससे पारंपरिक प्रक्रिया में समंस की डिलीवरी तथा उसकी स्थिति की जानकारी जुटाने में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली का हैंड्स-ऑन डेमोंस्ट्रेशन भी कराया गया। उन्हें वास्तविक न्यायालयीन कार्यप्रणाली में प्रणाली के अलग-अलग चरणों के उपयोग की जानकारी दी गई, ताकि इसे नियमित कामकाज में आसानी से लागू किया जा सके।

ई-समंस व्यवस्था लागू होने से समंस भेजने, उसकी डिलीवरी और संबंधित रिपोर्ट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और ट्रैक करने योग्य बनाने में मदद मिलेगी। दुर्ग जिला न्यायालय की यह पहल न्यायिक कामकाज में तकनीक के बढ़ते उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।