सीटों की मारामारी के बीच नई ट्रेनों की मांग, दुर्ग से हरिद्वार-अमृतसर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने का प्रस्ताव

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बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के दुर्ग-रायपुर रेल क्षेत्र से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें संचालित होती हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण रूटों पर सीधी सेवा उपलब्ध नहीं होने और मौजूदा ट्रेनों में लंबी वेटिंग के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार, कामाख्या, वाराणसी और मुंबई जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव लगातार बना हुआ है।

यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए दुर्ग सांसद विजय बघेल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर नई ट्रेनें शुरू करने और कुछ मौजूदा ट्रेनों को नियमित करने की मांग की है। सांसद ने दुर्ग-हरिद्वार स्पेशल और दुर्ग-सुल्तानपुर स्पेशल को नियमित करने के साथ ही दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने का प्रस्ताव दिया है।

इसके अलावा दुर्ग-अमृतसर, दुर्ग-बनारस वंदे भारत और कामाख्या-दुर्ग अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू करने की मांग भी की गई है। दुर्ग-अंबिकापुर इंटरसिटी तथा कोरबा-रायपुर इंटरसिटी का विस्तार दुर्ग तक करने का प्रस्ताव भी रेल मंत्रालय के सामने रखा गया है।

दुर्ग और रायपुर से हरिद्वार के लिए सीधी नियमित ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को पहले बिलासपुर जाना पड़ता है। इसके बाद बिलासपुर से उत्कल एक्सप्रेस पकड़कर हरिद्वार की यात्रा करनी होती है। इससे यात्रियों का अतिरिक्त समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।

यात्रियों का कहना है कि दुर्ग से बिलासपुर पहुंचने में ही करीब दो घंटे लग जाते हैं। इसके बाद ट्रेन पकड़ने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ते हैं। परिवार के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह व्यवस्था और अधिक परेशानी वाली हो जाती है। दुर्ग-हरिद्वार ट्रेन को नियमित किए जाने से यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

कामाख्या के लिए कर्मभूमि एक्सप्रेस प्रमुख रेल सेवा है, लेकिन यह साप्ताहिक ट्रेन होने के कारण इसमें यात्रियों का दबाव अधिक रहता है। मौजूदा स्थिति में स्लीपर और एसी दोनों श्रेणियों में नो-रूम की स्थिति बताई जा रही है। इससे यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए काफी परेशानी हो रही है।

वहीं वाराणसी जाने के लिए सारनाथ एक्सप्रेस और गोंदिया-बरौनी जैसी ट्रेनें उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें भी लंबी वेटिंग चल रही है। दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन संचालित होती है। यात्रियों का कहना है कि कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर उन्हें यात्रा की तारीख बदलनी पड़ती है या दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ता है।

दुर्ग-रायपुर क्षेत्र मुंबई-हावड़ा रेल कॉरिडोर पर स्थित होने के कारण यहां से मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेनों में भी यात्रियों का दबाव लगातार बना रहता है। कई बार यात्रियों को अपनी पसंद की तारीख पर सीट उपलब्ध नहीं हो पाती। नई ट्रेनों के संचालन या मौजूदा सेवाओं के विस्तार से यात्री दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

रेलवे के अनुसार किसी नई ट्रेन के संचालन से पहले कई तकनीकी और परिचालन पहलुओं की जांच की जाती है। सबसे पहले संबंधित रूट पर लाइन क्षमता और टाइम स्लॉट की उपलब्धता देखी जाती है। इसके बाद रैक-कोच, पिट लाइन, मेंटेनेंस सुविधाओं और लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर समेत आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता का आकलन किया जाता है।

इसके अलावा ट्रैक, सिग्नल और इलेक्ट्रिक सिस्टम की क्षमता, यात्री मांग तथा प्रस्तावित ट्रेन की उपयोगिता का भी परीक्षण किया जाता है। संबंधित विभागों की रिपोर्ट और सभी आवश्यक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही नई ट्रेन या सेवा विस्तार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।

बिलासपुर मुख्यालय के सीपीआरओ शेख समी उर रहमान ने कहा कि सांसद की ओर से की गई मांगों का संबंधित विभाग द्वारा गहन विश्लेषण किया जाता है। मांग की व्यवहारिकता, यात्री सुविधा और अन्य आवश्यक पहलुओं का परीक्षण करने के बाद ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

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