सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में फैसला, 3 दोषियों को फांसी और एक को आजीवन कारावास

court saja_150_250kb

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने चारों दोषियों को सजा सुना दी है। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मृत्युदंड की सजा दी है, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सजा हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े आरोपों में सुनाई गई है।

इस मामले में अदालत ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता संजय अंबस्ट ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को फांसी और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

मामला 14 अक्टूबर 2024 का है। अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद उनकी बेटी की भी धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। दोनों के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिए गए थे। घटना सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था।

बताया गया कि घटना से कुछ दिन पहले 9 अक्टूबर की रात जगराता कार्यक्रम के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का कुछ युवकों से विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस संदीप को थाने लेकर गई थी। आरोप है कि वहां उसके साथ मारपीट हुई। इसी घटना को लेकर कुलदीप नाराज था और उसने विवाद से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की योजना बनाई।

13 अक्टूबर की शाम कुलदीप अपने साथियों के साथ पुराना बस स्टैंड के पास मौजूद था। आरक्षक घनश्याम सोनवानी ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान कुलदीप ने आरक्षक पर गर्म तेल फेंक दिया और तलवार से हमला करने की धमकी देते हुए मौके से भाग निकला। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।

आरोप है कि उसी रात कुलदीप हेड कॉन्स्टेबल के घर पहुंचा। वहां उसने उनकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और फिर चाकू से उनकी हत्या कर दी। इसके बाद उनकी बेटी को भी मौत के घाट उतार दिया गया। दोनों शवों को घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिया गया था।

हेड कॉन्स्टेबल जब रात में ड्यूटी से घर लौटे तो घर के अंदर खून बिखरा मिला। उनकी पत्नी और बेटी वहां मौजूद नहीं थीं। दीवारों और फर्श पर खून के निशान देखकर उन्होंने दोनों की तलाश शुरू की। अगले दिन घर से करीब पांच किलोमीटर दूर दोनों के शव बरामद किए गए।

वारदात के बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया। इसी दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू पर पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार होने का भी आरोप लगा। वह भागकर झारखंड पहुंच गया था। बाद में बलरामपुर पुलिस ने उसे बस से उतरते समय गिरफ्तार कर लिया।

मां-बेटी की हत्या की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इस दौरान कुलदीप साहू के घर और गोदाम के बाहर खड़े वाहनों में आगजनी की घटना भी हुई थी। हालात को संभालने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया था।

29 सितंबर को अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू का एक वीडियो सामने आया था। अदालत से बाहर निकलते समय वह हंसता हुआ दिखाई दिया था और उसने पत्रकारों की ओर स्माइली का इशारा करते हुए वीडियो बनाने को कहा था। अब अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई है।