5 साल से लंबित याचिका, सड़कों की हालत नहीं सुधरी; नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में खराब सड़कों की समस्या को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि वर्ष 2021 से लंबित जनहित याचिका के बावजूद सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में सड़क मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ में खराब सड़कों से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से प्रस्तुत शपथपत्रों में दी गई जानकारी पर अदालत ने चिंता जाहिर की।

कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2021 में याचिका शुरू होने के बाद भी प्रदेश की सड़कों, खासकर बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। अदालत ने संबंधित विभागों को सड़क मरम्मत के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

सुनवाई के दौरान सेंदरी-मोपका बाईपास सड़क का मुद्दा भी सामने आया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने शपथपत्र में बताया कि मोपका-सेंदरी सड़क अभी तक प्राधिकरण को हस्तांतरित नहीं हुई है।

फिलहाल सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है। इसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी राज्य के लोक निर्माण विभाग की है।

इस स्थिति पर अदालत ने हैरानी जताई। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने लोक निर्माण विभाग के सचिव का शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।

सुनवाई के दौरान बिलासपुर नगर निगम की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होने अथवा निगम की ओर से उचित प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देश का पालन नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आयुक्त को अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत के लिए किए गए प्रयासों और उठाए गए कदमों का विवरण शपथपत्र में देना होगा।

हाईकोर्ट ने बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना की प्रगति को लेकर भी जानकारी मांगी है। अदालत ने NHAI के बिलासपुर और रायपुर स्थित परियोजना अधिकारियों को शपथपत्र के जरिए यह बताने का निर्देश दिया है कि परियोजना पूरी होने में कितना समय लगेगा।

इससे परियोजना की वर्तमान स्थिति और उसके पूरा होने की संभावित समय-सीमा के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसे ठीक से चलने योग्य कहा जा सके।

उन्होंने आगामी पूजा पर्व को देखते हुए चिंता जताई कि यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत नहीं की गई, तो दुर्घटनाओं और लोगों के घायल होने का खतरा बना रहेगा। उन्होंने नगर निगम से तत्काल सड़कों को आवागमन के योग्य बनाने की मांग की।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। अदालत ने नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई तक सड़क मरम्मत के लिए किए गए प्रयासों का विवरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा है।

पूजा पर्व को ध्यान में रखते हुए सड़क सुधार की कार्रवाई पर भी विशेष जानकारी मांगी गई है। अब अगली सुनवाई में नगर निगम की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट और संबंधित विभागों के जवाब पर नजर रहेगी।

बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की पांच प्रमुख सड़कों का काम डामरीकरण के चरण तक पहुंच चुका है, लेकिन डामर की बढ़ती कीमत और उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं के कारण काम प्रभावित हो रहा है। ठेकेदारों ने स्वीकृत लागत में संशोधन की मांग की है।

ठेकेदार संघ की मांग शासन को भेजी गई है। अब एस्टीमेट में बदलाव को लेकर शासन के निर्देशों का इंतजार है। मंजूरी मिलने पर इन परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है।

जानकारी के अनुसार, इन पांच सड़कों की कुल लंबाई करीब 12 किलोमीटर है और इनकी अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई गई है।

इन पांच सड़कों पर होना है डामरीकरण

  • अशोक नगर रोड
  • साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी रोड
  • अपोलो रोड
  • स्मृति वन-शनि मंदिर रोड
  • अरपा अटल पथ

एस्टीमेट में संशोधन की मांग और शासन के फैसले का इंतजार होने के कारण इन सड़कों के काम की गति प्रभावित हो रही है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सड़क मरम्मत और लंबित परियोजनाओं को लेकर संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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