जियो पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, 10 हजार मुआवजा और 4 हजार मुकदमा खर्च देने का आदेश

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कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में मोबाइल नेटवर्क की खराब सेवा को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रिलायंस जियो को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता अभिनय पांडेय को कुल 14 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। इसमें 10 हजार रुपये मुआवजा और 4 हजार रुपये मुकदमे में हुए खर्च के रूप में शामिल हैं।

बैकुंठपुर स्थित जिला उपभोक्ता आयोग ने 7 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार, कंपनी को 60 दिनों के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। ऐसा नहीं करने पर 10 हजार रुपये की मुआवजा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

अभिनय पांडेय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और पढ़ाई के लिए रिलायंस जियो की मोबाइल सेवाओं का इस्तेमाल करते थे। उनके गांव सलका में लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई थी। बार-बार कॉल कटने और इंटरनेट की धीमी गति के कारण उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने और पढ़ाई से संबंधित नोट्स डाउनलोड करने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।

अभिनय पांडेय ने 21 सितंबर 2023 को जियो के अपीलीय अधिकारी को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी थी। कंपनी ने अगले दिन जवाब देते हुए नेटवर्क संबंधी समस्या स्वीकार की और छह महीने के भीतर सुधार का आश्वासन दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब दो साल बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद पांडेय ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में केंद्र सरकार के जन शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। पहली शिकायत के जवाब में कंपनी ने संबंधित क्षेत्र में पर्याप्त नेटवर्क कवरेज होने की बात कही, जबकि दूसरी शिकायत पर सीमित नेटवर्क कवरेज का हवाला दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी की ओर से अलग-अलग जवाब मिलने और नेटवर्क सुधारने के बजाय दूसरी दूरसंचार कंपनी में नंबर पोर्ट कराने की सलाह दिए जाने के बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान रिलायंस जियो ने कहा कि गांव में कंपनी का अपना मोबाइल टावर नहीं है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दूरसंचार कंपनियां उन क्षेत्रों में निवेश करने से बच सकती हैं, जहां पर्याप्त आर्थिक लाभ की संभावना नहीं होती। जियो ने ग्राहक के लगातार रिचार्ज कराने का तर्क भी पेश किया।

हालांकि, आयोग ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग के अध्यक्ष राकेश पांडेय और सदस्य चूरामन दास ने कहा कि दूरसंचार सेवा देने वाली कंपनी की जिम्मेदारी है कि वह ग्राहकों को उचित सेवा उपलब्ध कराए।

आयोग ने माना कि शिकायत के बावजूद नेटवर्क की समस्या दूर नहीं करना और ग्राहक को दूसरी कंपनी में जाने की सलाह देना सेवा में कमी को दर्शाता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आयोग ने जियो को शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा और 4 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।

इस तरह कंपनी को कुल 14 हजार रुपये का भुगतान 60 दिनों के भीतर करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 10 हजार रुपये की मुआवजा राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देय होगा।

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