छत्तीसगढ़ के पटवारी आज से बेमियादी हड़ताल पर, फसल गिरदावरी को लेकर सरकार से टकराव

पटवारी संघ का आरोप है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) और पीवी ऐप में आ रही तकनीकी खामियों के बावजूद पटवारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान पटवारियों के खिलाफ नोटिस जारी करने, तबादले और निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। इससे नाराज संघ ने कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की सूचना दी है। संघ का कहना है कि इन समस्याओं से शासन और राजस्व विभाग को पहले भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
पटवारियों की हड़ताल का एक प्रमुख कारण लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे भी हैं। संघ ने मांग की है कि इन समस्याओं पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए। साथ ही, मांगों को लंबे समय तक लंबित रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बलौदाबाजार-भाटापारा और महासमुंद जिलों में पटवारी संघ के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के तबादले, नोटिस जारी करने और निलंबन की कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी है। संघ ने इन कार्रवाइयों को द्वेषपूर्ण बताते हुए संबंधित आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
राजस्व पटवारी संघ ने सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को लिखे पत्र में खरीफ गिरदावरी वर्ष 2026-27 की प्रक्रिया में बदलाव पर आपत्ति जताई है। संघ के अनुसार, शासन ने 17 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) और ऑनलाइन फसल प्रविष्टि के लिए समय निर्धारित किया था। इसके तहत प्रदेश के पटवारी निर्धारित अवधि में गिरदावरी का काम कर रहे थे।
संघ का कहना है कि बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के पटवारी आईडी से ऑनलाइन फसल प्रविष्टि बंद कर दी गई और 18 सितंबर 2026 को पीवी ऐप के माध्यम से फसल गिरदावरी करने के निर्देश जारी कर दिए गए।
पटवारियों के मुताबिक, वर्तमान डीसीएस नक्शे लगभग तीन वर्ष पुराने हैं। तकनीकी खामियों के कारण मौके पर विभाजित किए गए कई खसरों के नक्शे अब तक डीसीएस में शामिल नहीं हो पाए हैं। ऐसे में खेतों की सही पहचान करने और फसल का भौतिक सत्यापन करने में परेशानी आ रही है।
पटवारी संघ ने बताया कि वर्तमान में खेतों में खरीफ फसलें लगी हुई हैं और कई स्थानों पर पानी भरा है। ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक खेत के चारों कोनों पर जाकर पीवी ऐप के माध्यम से फोटो लेना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
संघ के अनुसार, कई गांवों में 1,500 से लेकर 15,000 तक खसरों की फसल गिरदावरी का काम शेष है। कम समय में और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इस कार्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है।
पटवारियों ने यह आशंका भी जताई है कि जल्दबाजी और दबाव में गिरदावरी का काम कराने से किसानों को नुकसान हो सकता है। उनके मुताबिक, फसल संबंधी रिकॉर्ड में त्रुटियां होने या गिरदावरी समय पर पूरी नहीं होने की स्थिति में किसानों को धान समेत अन्य खरीफ फसलों की समर्थन मूल्य पर बिक्री में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्व पटवारी संघ ने मांग की है कि पीवी ऐप के माध्यम से फसल गिरदावरी कराने के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और पहले की तरह भुइयां पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन फसल प्रविष्टि की व्यवस्था बहाल की जाए। संघ का कहना है कि इससे किसानों की फसल खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित होने से बच सकती है।
संघ ने पीवी ऐप से गिरदावरी कराने की प्रक्रिया का पूर्ण बहिष्कार करने का ऐलान किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शासन ने दबावपूर्वक यह कार्य जारी रखा, तो प्रदेश के सभी पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना-प्रदर्शन करेंगे। संघ ने इस स्थिति के लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
