छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रामगोपाल अग्रवाल की 9.06 करोड़ की संपत्ति अटैच, कस्टम मिलिंग मामले में भी गिरफ्तारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और कस्टम राइस मिलिंग घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। शराब घोटाले की जांच के तहत ईडी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। साथ ही, रायपुर स्थित उनकी दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है, जिनकी कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है।

वहीं, कस्टम राइस मिलिंग घोटाले में ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच रायपुर ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच एक शराब सिंडिकेट आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) की व्यवस्था को प्रभावित कर रहा था। ईडी के अनुसार, सिंडिकेट ने देशी शराब की आपूर्ति पर अवैध कमीशन, सरकारी दुकानों से डुप्लीकेट होलोग्राम वाली बिना हिसाब की शराब की बिक्री, डिस्टिलरों से सालाना कमीशन और विदेशी शराब के लिए एफएल-10ए लाइसेंस व्यवस्था के जरिए 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जुटाई।

ईडी की जांच में दावा किया गया है कि शराब सिंडिकेट से जुटाई गई नकदी का बड़ा हिस्सा लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के माध्यम से रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के रायपुर स्थित कार्यालय राजीव भवन पहुंचाया जाता था।

एजेंसी के अनुसार, सिंडिकेट से जुड़े लोग यह रकम राजीव भवन में रामगोपाल अग्रवाल के अधीन काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र दादसेना को सौंपते थे। जांच में इस माध्यम से करीब 860 से 880 करोड़ रुपये नकद पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। ईडी का आरोप है कि इसमें से लगभग 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहे और उनके निर्देश पर रखे गए, इस्तेमाल किए गए या वितरित किए गए।

एजेंसी ने कहा है कि सिंडिकेट के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से कथित नकदी लेन-देन और रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका के संबंध में जानकारी मिली है।

शराब घोटाले की जांच के दौरान ईडी ने रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित रामगोपाल अग्रवाल के दो फ्लैटों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों का मूल्य करीब 9.06 करोड़ रुपये आंका गया है।

ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले में इससे पहले विशेष पीएमएलए अदालत में एक अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। एजेंसी इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत नौ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दे चुकी है।

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अब तक 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी थीं। रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों पर कार्रवाई के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 610.34 करोड़ रुपये हो गया है।

शराब घोटाले के अलावा रामगोपाल अग्रवाल का नाम कस्टम राइस मिलिंग घोटाले की जांच में भी सामने आया है। ईडी के अनुसार, यह मामला राइस मिलरों से कथित तौर पर करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा है।

इस मामले में जांच आयकर विभाग की अभियोजन शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। बाद में रायपुर एसीबी-ईओडब्ल्यू ने भी भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एफआईआर दर्ज की।

ईडी के मुताबिक, खरीफ सीजन 2021-22 में कस्टम राइस मिलिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई थी। आरोप है कि इसके बाद छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड के अधिकारियों से जुड़े एक सिंडिकेट ने प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले राइस मिलरों से 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से नकद वसूली शुरू कर दी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि जो राइस मिलर कथित अवैध रकम देने से इनकार करते थे, उनके बिल रोक दिए जाते थे। दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच इस तरीके से करीब 147 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने का दावा किया गया है। ईडी ने इस रकम को पीएमएलए के तहत अपराध से अर्जित आय माना है।

ईडी के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल ने कथित वसूली की व्यवस्था तैयार करने, उसकी निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी का दावा है कि राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के माध्यम से रकम वसूलने के निर्देश दिए जाते थे।

ईडी की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, विभिन्न जिलों से वसूली गई रकम की जानकारी तत्कालीन एसोसिएशन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को दी जाती थी। एजेंसी का कहना है कि रोशन चंद्राकर नियमित रूप से जिलेवार वसूली का विवरण रामगोपाल अग्रवाल को सत्यापन के लिए देते थे। इसके बाद कथित तौर पर नकदी उन लोगों तक पहुंचाई जाती थी, जिनके नाम रामगोपाल अग्रवाल बताते थे।

ईडी ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान रामगोपाल अग्रवाल ने सहयोग नहीं किया और कथित अवैध वसूली से प्राप्त रकम के संग्रह, संचालन तथा इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन की ईडी हिरासत मिली।

फिलहाल, दोनों मामलों में ईडी की जांच जारी है। एजेंसी का कहना है कि अपराध से अर्जित धन के अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान करने और पूरे कथित वित्तीय नेटवर्क की जानकारी जुटाने के लिए आगे की जांच की जा रही है।

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