CGPSC भर्ती घोटाला: टामन सिंह सोनवानी की जमानत पर हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, CBI ने लगाए गंभीर आरोप

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय बाद में सुनाने का फैसला किया।

यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष रहते हुए टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा अपने रिश्तेदारों और कुछ प्रभावशाली लोगों के परिजनों को अनुचित लाभ पहुंचाया। मामले में रिश्वतखोरी और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

सीबीआई ने 18 नवंबर 2024 को टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि श्रवण कुमार गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर 45 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। सीबीआई के मुताबिक, यह रकम ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से दो किस्तों में दी गई थी। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि सोनवानी के परिजन इस समिति से जुड़े हुए थे।

CGPSC की वर्ष 2021 की परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों के आयोग के अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली कारोबारियों से कथित संबंधों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। चयन प्रक्रिया में पक्षपात और योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगे थे।

इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों की सूची प्रस्तुत करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।

शुरुआत में मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने की। बाद में राज्य सरकार के संदर्भ पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली।

सीबीआई ने जुलाई 2024 में मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और अन्य संबंधित अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गई।

जांच एजेंसी की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि CGPSC-2021 की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए थे। सीबीआई ने सोनवानी के भतीजों और एक कारोबारी के परिजनों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने की साजिश का भी आरोप लगाया है।

इसके अलावा, जांच एजेंसी ने आयोग के नियमों में परिवार और रिश्तेदारों से संबंधित प्रावधानों में बदलाव के जरिए कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश किए जाने का दावा किया है। मामले में आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक से जुड़े अधिकारी सहित अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावों और चार्जशीट पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है।

नवंबर 2024 से जेल में बंद टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अब हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार है। अदालत का निर्णय तय करेगा कि उन्हें इस मामले में जमानत मिलती है या फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

CGPSC भर्ती घोटाले ने प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।