बांकी डैम की नहर पर भूमाफियाओं का कब्जा, 30 अतिक्रमण हटाए; पांच मंजिला इमारतों पर चला बुलडोजर

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का बड़ा मामला सामने आया है। शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले बांकी डैम की नहर और आसपास की बेशकीमती शासकीय जमीन पर कथित तौर पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर प्लॉटिंग कर दी। आरोप है कि सरकारी जमीन पर भूखंड बेचकर वहां बहुमंजिला पक्के मकान और इमारतें तक खड़ी कर दी गईं। करीब 10 साल से चल रहे इस अतिक्रमण के मामले में अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर सीमांकन के बाद कब्जे हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है।
बांकी डैम से ग्राम सोहगा तक जाने वाली करीब 11 किलोमीटर लंबी नहर की जमीन पर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, मुख्य नहर की चौड़ाई लगभग 120 फीट यानी 36 मीटर है। आरोप है कि इसमें करीब 18 मीटर तक की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। वहीं, 16 मीटर चौड़ी सब-माइनर नहर को अतिक्रमण के कारण कथित तौर पर महज 4 मीटर की नाली तक सीमित कर दिया गया।
नहर की जमीन पर जगह-जगह प्लॉटिंग कर भूखंड बेचे जाने और उन पर पक्के निर्माण किए जाने की बात भी सामने आई है। इनमें कई बहुमंजिला इमारतें शामिल हैं।
शासकीय जमीन का सीमांकन पूरा होने के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। बीते तीन दिनों से लगातार बुलडोजर चलाकर कब्जे हटाए जा रहे हैं। इस दौरान कुछ कब्जाधारियों ने विरोध भी किया। हालांकि, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन की टीम कार्रवाई जारी रखे हुए है।
प्रशासनिक कार्रवाई के लिए करीब 40 कर्मचारियों की टीम और आधा दर्जन जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। 13 अक्टूबर से शुरू हुई कार्रवाई के दौरान मंगलवार और बुधवार को लगभग एक किलोमीटर के दायरे में 23 मकानों से कब्जा हटाया गया। गुरुवार को पांच मंजिला सात इमारतों पर भी कार्रवाई की गई। खबर के अनुसार, अब तक कुल 30 बड़े अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।
प्रशासन ने करीब 200 कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए हैं। शेष अतिक्रमणों को भी हटाने की तैयारी की जा रही है।
इस मामले में अंबिकापुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम ने शासकीय जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग करते हुए कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से दस्तावेजों के साथ शिकायत की थी। शिकायत में सब-माइनर नहर की जमीन पर कथित कब्जे का मुद्दा उठाया गया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने जमीन का सीमांकन कराने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि नहर की जमीन पर कब्जा सुनियोजित तरीके से किया गया। उनके मुताबिक, वर्ष 2016 से ही जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2021 में जल संसाधन विभाग को लिखित शिकायत दी गई थी।
आलोक दुबे के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच विभाग के दो कार्यपालन अभियंताओं ने एसडीएम और तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि बांकी डैम का पानी अब सिंचाई के बजाय शहर की पेयजल आपूर्ति में इस्तेमाल किया जा रहा है। डैम से पानी नगर निगम के तकिया प्लांट तक पहुंचता है, जहां से शहर में सप्लाई की जाती है।
नहरों में लंबे समय से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण कुछ लोगों ने जमीन को खाली समझकर उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि, प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, नहर की जमीन अब भी जल संसाधन विभाग की शासकीय भूमि है।
सीमरन होटल से सांसद चिंतामणि महाराज के निवास की ओर जाने वाली माइनर नहर की जमीन पर भी अतिक्रमण किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कच्ची नहर और स्पष्ट सीमांकन के अभाव का फायदा उठाकर जमीन के विभिन्न हिस्सों पर कब्जा किया गया।
एसडीएम बान सिंह नेताम के मुताबिक, सीमांकन के दौरान करीब 36 मीटर चौड़ी नहर की जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। कब्जाधारियों को पहले नोटिस जारी किए गए थे। अब शासकीय जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
