छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से 7,955 ज्यादा कैदी, बेमेतरा ओपन जेल अब तक बंद; हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की मौजूदगी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर हाई कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए शपथपत्र के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश की 33 जेलों में बंदियों को रखने की निर्धारित क्षमता 15,025 है, जबकि 30 सितंबर तक यहां 22,980 कैदी बंद थे। यानी जेलों में तय क्षमता से 7,955 अधिक कैदी मौजूद हैं। इस बीच, जेलों में बढ़ती भीड़ को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित बेमेतरा की ओपन जेल अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

राज्य की केंद्रीय जेलों, जिला जेलों और उपजेलों में बंदियों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जेलों की कुल क्षमता 15,025 कैदियों की है, जबकि इनमें 22,980 बंदी रखे गए हैं। इस तरह जेलों में निर्धारित क्षमता से करीब 53 प्रतिशत अधिक कैदी मौजूद हैं।

बढ़ती भीड़ के कारण कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चुनौतियां बढ़ने की आशंका है। इस स्थिति ने जेल प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।

जेलों में कैदियों का दबाव कम करने के लिए बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन यानी खुली जेल स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए अधिसूचना जारी करने के साथ 48 पदों के सृजन की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, 21 सितंबर 2026 के आदेश के तहत शुरुआती चरण में 15 कर्मचारियों की तैनाती को भी मंजूरी दी गई।

इसके बावजूद सुरक्षा से जुड़े तकनीकी और मैदानी मुद्दों के कारण यह परियोजना अब तक शुरू नहीं हो पाई है। प्रशासन की ओर से जेल अधीक्षक की नियुक्ति और सीधी भर्ती की अनुमति जैसे विषयों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, जेल शुरू होने में हो रही देरी से कैदियों की बढ़ती संख्या के बीच राहत मिलने का इंतजार बना हुआ है।

जेलों में भीड़ की समस्या के साथ-साथ सरकार बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी कर रही है। इसी दिशा में 17 अगस्त को रायपुर के जन शिक्षण संस्थान के साथ समझौता किया गया। इसके तहत कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे रिहाई के बाद उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकें।

इसके अलावा, कैदियों को मिलने वाले पारिश्रमिक की दरों में वृद्धि पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं, 12 फरवरी को इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए समझौते का उद्देश्य सजा पूरी कर जेल से बाहर आने वाले पात्र बंदियों को बैंक ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना है।

जेलों की क्षमता और मौजूदा स्थिति से संबंधित राज्य सरकार के शपथपत्र को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड पर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या और बेमेतरा ओपन जेल परियोजना की मौजूदा स्थिति पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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