रेल विकास को मिलेगी रफ्तार: 295 KM की नई रेल लाइन का पूरा खर्च उठाएगी साय सरकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ नई रेल लाइन परियोजना के लिए शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीआरसीएल) के माध्यम से राज्य सरकार परियोजना में पूरी पूंजी लगाएगी।

करीब 295 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन परियोजना के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरी वित्तीय जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया गया है। इससे परियोजना के लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्माण कार्य में आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कटघोरा से डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित यह रेल लाइन पिछले करीब 16 वर्षों से विभिन्न प्रक्रियाओं और इंतजार के दौर से गुजर रही थी। इस रेल मार्ग के निर्माण से कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम और राजनांदगांव क्षेत्र के कई हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय छत्तीसगढ़ के विकास और आम जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रस्तावित रेल लाइन कटघोरा से शुरू होकर तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी। संभावित मार्ग में प्रमुख रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं:

  • कटघोरा (कोरबा): कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी।
  • तखतपुर (बिलासपुर): व्यापारिक गतिविधियों और यात्रियों को रेल सुविधा का लाभ।
  • मुंगेली: कृषि और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना।
  • कवर्धा (कबीरधाम): पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहतर आवागमन।
  • खैरागढ़: कला और संगीत के क्षेत्र में पहचान रखने वाले शहर को रेल सुविधा।
  • डोंगरगढ़ (राजनांदगांव): मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ने का अवसर।

इस रेल परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में यात्री परिवहन के साथ-साथ माल ढुलाई की सुविधाएं भी बेहतर हो सकती हैं। मुंगेली और कवर्धा जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों के किसानों और व्यापारियों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी। वहीं, खनिज संसाधनों और औद्योगिक गतिविधियों को भी बेहतर परिवहन नेटवर्क का लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा डोंगरगढ़, कवर्धा और खैरागढ़ जैसे पर्यटन एवं धार्मिक महत्व वाले शहरों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

परियोजना की आगे की प्रगति में भूमि अधिग्रहण, निर्माण संबंधी स्वीकृतियां, टेंडर और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। परियोजना को लेकर अगले 4 से 5 वर्षों में रेल परिचालन शुरू करने का लक्ष्य बताया जा रहा है। हालांकि, इसके लिए निर्माण कार्य की वास्तविक शुरुआत और आधिकारिक समय-सीमा महत्वपूर्ण होगी।

राज्य सरकार के शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के फैसले से इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत हुआ है। अब क्षेत्र के लोगों की नजरें इसके धरातल पर उतरने और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।

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