चक्रवात ‘मुरासु’ का अलर्ट: 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा तूफान, छत्तीसगढ़ में 4 नवंबर तक भारी बारिश की चेतावनी

रायपुर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ से हुए नुकसान का आकलन अभी पूरा भी नहीं हुआ है कि बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने की चेतावनी जारी कर दी गई है। इस नए संभावित तूफान का नाम ‘मुरासु’ रखा गया है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। इसका प्रभाव आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
दक्षिण-पूर्व और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब लगातार सक्रिय है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले कुछ घंटों में यह सिस्टम और ताकतवर होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।
फिलहाल यह सिस्टम चेन्नई, विशाखापट्टनम, नेल्लोर, मछलीपट्टनम और ओंगोल जैसे प्रमुख तटीय शहरों से दूर है। हालांकि, इसके प्रभाव से समुद्र में हलचल बढ़ने और तेज हवाएं चलने की आशंका है। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में इसके और शक्तिशाली होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘मुरासु’ 3 नवंबर 2026 की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है। वहीं, तेज झोंकों के साथ हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
संभावित खतरे को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा समुद्र में पहले से मौजूद मछुआरों को सुरक्षित लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
चक्रवात ‘मुरासु’ का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर सहित राजनांदगांव और दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।
पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 नवंबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। वहीं, 3 और 4 नवंबर को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का अनुमान है। बारिश के चलते तापमान में गिरावट आने और मौसम में ठंडक बढ़ने की संभावना जताई गई है।
भारी बारिश और संभावित प्राकृतिक आपदा को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपातकालीन सेवाओं और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं, कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खुले में रखे अनाज और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। जिन किसानों की फसल खेतों में तैयार खड़ी है, वे भी मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए जरूरी सावधानियां बरतें।
इसके अलावा, तटीय क्षेत्रों में रेल और हवाई सेवाओं पर भी मौसम की स्थिति के अनुसार नजर रखी जा रही है, ताकि संभावित खराब मौसम के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
