छत्तीसगढ़ में पटवारियों पर सरकार की सख्ती, 150 से ज्यादा निलंबित; 1000 से अधिक को ब्रेक इन सर्विस की चेतावनी

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 13 अक्टूबर से आंदोलन कर रहे पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। वहीं, राज्य सरकार ने भी अब सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। हड़ताल खत्म कर काम पर नहीं लौटने वाले 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक हजार से ज्यादा पटवारियों को ब्रेक इन सर्विस की चेतावनी जारी की गई है।

सरकार ने पटवारियों को काम पर लौटने और अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों समेत प्रदेशभर में एक हजार से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में निर्धारित समय के भीतर काम पर नहीं लौटने पर अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दूसरी ओर, पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप के मुताबिक, पीवी ऐप की तकनीकी खामियों को दूर करने, वेतन विसंगति समाप्त करने और राजस्व निरीक्षक (आरआई) के पद पर पदोन्नति जैसी मांगों को लेकर हड़ताल जारी रहेगी।

पटवारियों की हड़ताल का असर अब राजस्व और कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर दिखाई देने लगा है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, एग्रीस्टैक, किसान अभिलेख सत्यापन, नामांतरण और बंटवारा जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को हो सकती है, जिनके खेतों का डिजिटल सर्वे अब तक पूरा नहीं हुआ है। सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया अधूरी रहने पर इन किसानों के धान खरीदी केंद्रों में उपज बेचने में बाधा आ सकती है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने पटवारियों की मांगों का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

कमल वर्मा ने कहा कि पीवी ऐप की तकनीकी समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए। वेतन विसंगति का निराकरण, पदोन्नति और पीवी ऐप को स्थगित करने जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पटवारियों के खिलाफ स्थानांतरण, कारण बताओ नोटिस और निलंबन जैसी कार्रवाई करने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

पटवारियों के आंदोलन की प्रमुख वजह पीवी ऐप (Physical Verification) को बताया जा रहा है। इस ऐप के जरिए खेतों में बोई गई फसलों का भौतिक सत्यापन यानी गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे किया जाना है। सरकार ने इस व्यवस्था को अनिवार्य किया है, लेकिन पटवारी इसे तकनीकी रूप से अव्यावहारिक बता रहे हैं।

पटवारियों के अनुसार, ऐप में बार-बार सर्वर डाउन होने की समस्या आती है। डेटा अपलोड करने में काफी समय लगता है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण खेतों में मौके पर जाकर जानकारी दर्ज करना भी मुश्किल हो जाता है।

पटवारी संघ का आरोप है कि पुराने ऑनलाइन भुइयां प्लेटफॉर्म को बंद कर अचानक नया पीवी ऐप लागू कर दिया गया। इसमें पॉलीगॉन मैपिंग जैसी जटिल तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल हैं, लेकिन कर्मचारियों को इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

पटवारियों का यह भी कहना है कि पहले से ही उनके जिम्मे डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, स्वामित्व योजना सहित कई सरकारी कार्य हैं। ऐसे में तकनीकी खामियों से जूझ रहे नए ऐप के माध्यम से कम समय में शत-प्रतिशत सत्यापन पूरा करने का दबाव उनके लिए परेशानी और मानसिक तनाव बढ़ा रहा है।

फिलहाल पटवारियों और सरकार के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में धान खरीदी शुरू होने से पहले हड़ताल खत्म नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों और खरीदी की तैयारियों पर पड़ सकता है।

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