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बरसात में छह जिलों में 38 हजार मीट्रिक टन धान भीगी, कलेक्टर व अधिकारियों को नोटिस जारी

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रायपुर। पिछले दिनों हुई बरसात में छह जिलों में 38 हजार मीट्रिक टन धान भीग गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद मंत्रिमंडलीय उप समिति ने 6 जिलों के कलेक्टर, मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों और सहकारी समितियों के उप पंजीयक को नोटिस जारी करने का फैसला किया है। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने इसे लापरवाही का मामला बताया है। मंत्री मंडलीय उप समिति की बैठक में बरसात की वजह से धान के भीगने की रिपोर्ट देखी। अधिकारियों ने बताया, बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद और रायपुर जिलों में कुल 38 हजार मीट्रिक टन धान बारिश से भीगा है। हालांकि अधिकारियों ने इससे नुकसान की बात स्वीकार नहीं की। उनका कहना था धान भीगने के बाद बारदानों को पलटकर सुखाया गया था। धान को सुखाकर इसकी मिलिंग कराई जा सकती है। इस रिपोर्ट को मंत्रियों ने गंभीरता से लिया।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा, धान खरीदी केन्द्रों में धान को बारिश से बचाव के लिए कैप कवर, तालपत्री सहित विभिन्न इंतजाम के लिए पर्याप्त राशि सहकारी समितियों को उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद भी बेमौसम बारिश से धान को भीगने से बचाने में लापरवाही हुई है। उन्होंने कहा, 6 जिलों बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमंुद और रायपुर जिलों के कलेक्टर, जिला विपणन अधिकारियों और उप पंजीयकों को नोटिस जारी करने की अनुशंसा की गई है।

मंत्रियों का कहना था, मौसम विभाग ने बारिश संबंधी अलर्ट पहले से ही जारी कर दिया था। इसके साथ-साथ शासन की ओर से भी धान सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्था के लिए राशि जारी कर दी गई थी। इसके बाद भी धान को भीगने से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए। मंत्रियों ने कहा, धान खरीदी के साथ-साथ इसकी सुरक्षा की जवाबदेही भी हमारी है। बारिश के पहले एवं बाद में नियमित रूप से भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया गया। सही समय में कैप कवर, तालपत्री तथा अन्य आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाती तो धान भीगने जैसी स्थिति भी उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो इस पर विशेष ध्यान रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।