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नवरात्रि के लिये जगमगाई धर्म नगरी, रोपवे नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों तक दिन रात रहेगा चालू

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डोंगरगढ़| 10 हजार ज्योति कलश होंगे प्रज्जवलित, रोपवे नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों तक दिन रात चालू रहेगा| छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है।

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज से हो गई है। नीचे से लेकर ऊपर पहाड़ी तक रंगीन लाइटें जगमगा रही हैं। इस बार 10 हजार ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं।

नवरात्रि में मां के दर्शन के लिए लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। करीब 1100 सीढ़ियां चढ़कर लोग मां का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं।डोंगरगढ़ देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां आदि शक्ति मां बगलामुखी को समर्पित दो मंदिर हैं।

एक 1600 फीट की ऊंचाई और दूसरा मंदिर नीचे समतल जमीन पर स्थित है। बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के जवानों की तैनाती मंदिर ट्रस्ट समिति ने बताया कि, रोपवे नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों तक दिन रात चालू रहता है। सीढ़ियों पर दर्शनार्थियों के बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के जवानों की तैनाती रहते है|

सीढ़ियों पर दर्शनार्थियों के लिए पेय जल, विश्राम गृह जैसी तमाम व्यवस्थाएं की गई है। भीड़ को देखते हुए दिन रात मंदिर का पट माता के दर्शन के लिए खुला रहेगा। हजारों की संख्या में जवानों की तैनाती की गई है।

हर साल लगता है मेला, डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर हर साल दोनों नवरात्र में भव्य मेला लगता है। माता के दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए सुव्यवस्थित सीढिया के साथ ही दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए रोप-वे भी बनाया गया है।

डोंगरगढ़ आने वाले दर्शनार्थियों के लिए रेलवे की ओर से कई सुपरफास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज के साथ मेला स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन किया जाएगा। लोगों का मानना है कि यहां मां बमलेश्वरी के दर्शन मात्र से उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसलिए यहां हर साल भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत 9 अप्रैल, मंगलवार से हो रही है। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सालभर में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व काफी ज्यादा होता है।

माना जाता है कि नवरात्रि में माता की पूजा-अर्चना करने से खास कृपा होती है। मां दुर्गा की सवारी वैसे तो शेर है, लेकिन जब वह धरती पर आती हैं तो उनकी सवारी बदल जाती है। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर धरती पर आएंगी।