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Mohan Cabinet Decision : मोहन मंत्रिमंडल ने लिए बड़े फैसले, देखें किसे क्या मिला

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भोपाल| मध्यप्रदेश की मोहन कैबिनेट की अहम बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई, जिसमें कई अहम फैसलों को मंजूरी दे दी गई। मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी मीडिया को दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रिमंडल समूह की अहम बैठक हुई। सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति और सावन माह का विशेष महत्व है, इसलिए सरकार लाडली बहनों को भी सौगात दी है। उन्हें प्रतिमाह जारी होने वाली 1250 रुपए की राशि अलग से दी जाएगी।
विजयवर्गीय ने बताया कि सभी मंत्री केंद्रीय बजट में अपने-अपने विभाग से संबंधित सरकार की योजनाओं पर ध्यान देकर मध्य प्रदेश में उन्हें लागू करवाने का प्रयास करेंगे। मध्यप्रदेश में सावन माह में भगवान शिव के मंदिर हैं उनके आसपास ट्रैफिक व्यवस्था अच्छी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं और मंत्रियों से ध्यान देने को कहा गया है। बारिश में जलभराव की स्थिति पर भी नजर रखने को कहा गया है।

नई आईटी पॉलिसी तैयार

राज्य सरकार ने आईटी के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई आईटी पॉलिसी तैयार की है। इसके तहत कई बंदुओं पर सिंगल विंडो क्लियरेंस और कैपिटल एक्सपेंडिचर में भी मदद करेगी। मार्केटिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन में सहायता करेगी। साथ ही पेटेंट फाइलिंग में भी सहयोग करेगी। इंवेस्टर्स को सस्ती भूमि दी जाएगी और स्टांप ड्यूटी पंजीयन में भी छूट दी जाएगी। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए देश की सभी IT पॉलिसी का अध्ययन कर ये पॉलिसी लाई गई है।

शिक्षा के क्षेत्र में खास

इसी के साथ हायर एजुकेशन में संभागीय मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों को सशक्त करने के लिए भवनों के निर्माण के लिए 7 करोड़ 45 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। निवाड़ी जिले में अस्थाई पदों की स्वीकृति सामान्य प्रशासन विभाग ने कर दी है।

केन बेतवा के लिए क्या

भारत सरकार ने हाल ही में आर्थिक सर्वेक्षण 2024 जारी किया है। इस संदर्भ में कहा गया है कि 2018 से 2023-24 में हम विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले प्रदेश हैं और हम पंद्रह अंक आगे बढ़ गए हैं। मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश में केन-बेतवा परियोजना से दोनों राज्यों को लाभ होगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगी। ये योजना 72 हजार करोड़ की है, जिसमें से 35 हजार करोड़ राज्य सरकार खर्च करेगी।