Google Analytics —— Meta Pixel

उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक पर लगाया ढाई लाख रुपए का जुर्माना, पढ़िए क्या है मामला

sbi

जगदलपुर। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक प्रकरण में भारतीय स्टेट बैंक कलेक्ट्रेट शाखा को 2 लाख 50 हज़ार रुपए का जुर्माना और मानसिक क्षति के लिए 5 हज़ार रुपए उपभोक्ता को देने का आदेश पारित किया है। जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष सुजाता जायसवाल, सदस्य आलोक कुमार दुबे और सीमा गोलछा की संयुक्त खंडपीठ द्वारा उक्त आदेश जारी किया गया है। होम लोन के किश्त पूरी होने के बाद भी बंधक संपत्ति के दस्तावेज वापस नहीं करने पर यह कार्यवाही की गई है।

जगदलपुर निवासी सरोज देवी और अखिलेश कुमार चौहान ने भारतीय स्टेट बैंक की कलेक्ट्रेट शाखा से होम लोन लिया था। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा होम लोन प्रदान करने के लिए आवेदक की अचल संपत्ति के दस्तावेज अपने अधिपत्य में रखा था। लोन की ईएमआई की राशि का संपूर्ण भुगतान करने के बाद भी 30 दिनों की अवधि के भीतर भूमि से संबंधित दस्तावेज बैंक ने प्रदान नहीं किया। आवेदक ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत पेश करने की।

इस पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने माना है कि भारतीय स्टेट बैंक एक बैंकिंग संस्थान है एवं बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 तथा रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट 1934 एवं रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रदत दिशा निर्देशों का पालन करना बैंक का दायित्व है। जिसके अनुसार ऋण अदाएगी के 30 दिनों के भीतर बैंक द्वारा अपने अधिपत्य में रखे गए दस्तावेजों को वापस दिया जाना है।

आवेदकगण को भूमि से संबंधित दस्तावेज 30 दिनों के भीतर प्रदान न कर बैंक द्वारा सेवा में कमी एवं व्यवसायिक कदाचरण किया गया है। होम लोन की संपूर्ण अदायगी के पश्चात आवेदक को दस्तावेज दिए जाने में हुए विलंब की अवधि 50 दिनों के लिए प्रतिदिन 5 हज़ार रुपए की दर से कुल 2 लाख 50 हज़ार रुपए का जुर्माना बैंक पर किया गया है। आवेदकगण को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 5 हज़ार रुपए अलग से दिए जाने का भी आदेश पारित किया गया है।

रीसेंट पोस्ट्स