जनहित याचिका पर सुनवाई: हाईवे किनारे शराब दुकानों, ढाबों के बाहर खड़ी गाडिय़ों से हो रहे हादसे, हाईकोर्ट ने सरकार, एनटीपीसीऔर एसईसीएल से मांगा जवाब
बिलासपुर। प्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बुधवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईवे के किनारे चल रही शराब दुकानों, ढाबों और खुले में फ्लाई ऐश ढो रहे डंपरों को हादसों की बड़ी वजह मानते हुए राज्य सरकार, एनटीपीसी और एसईसीएल से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा कि सड़कें सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि नागरिकों की जान की सुरक्षा से जुड़ी है। हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
सड़क हादसों को लेकर पिछले साल हाईकोर्ट ने खबरों पर संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू की थी। एडवोकेट रवींद्र शर्मा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। उन्होंने पिछली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि मुंगेली जिले के सरगांव में नगर पंचायत कार्यालय के पास ब्लैक स्पॉट है, यहां हाईवे से सटी शराब दुकान संचालित हो रही है।
यह राज्य सरकार के नियमों के खिलाफ है, जिसमें हाईवे से 500 मीटर के दायरे में शराब दुकान प्रतिबंधित है। उसी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बरम देव ढाबा संचालित किया जा रहा है। ढाबे के सामने वाहन पार्किंग के कारण सड़क पर अव्यवस्था फैली हुई है, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है।