Google Analytics —— Meta Pixel

समंदर में डूबता जा रहा है यह देश, पानी के अंदर समा चुकी हैं सड़कें, डर में जी रहे हैं लोग, जानिए वजह!

1

किरिबाती| न्यू ईयर 2025 का सबसे पहले स्वागत करने वाला द्वीप किरिबाती बड़े खतरे से जूझ रहा है, 33 द्वीपों के इस समूह में से कई द्वीप डूबने की कगार पर है. ऐसा ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो रहा है. जलवायु परिवर्तन की वजह से पिघलते ग्लेशियर और समुद्र का गर्म होने से इसके कई हिस्से डूब भी चुके हैं, वैज्ञानिक अनुमान जता चुके हैं कि 2100 तक किरबाती के कई द्वीप पूरी तरह से समुद्र में डूब जाएंगे.

किरिबाती द्वीप समूह पर नया साल 2025 सबसे पहले मनाया गया. भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 31 मिनट पर ही नया नए साल का जश्न शुरू हो गया था. यह द्वीप प्रशांत महासागर में है जो भूमध्य रेखा पर बसा हुआ है. यहां के 33 द्वीपों में से तकरीबन 20 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं. यह आईलैंड तीन हिस्सों में बंटा है, जिसमें गिल्बर्ट द्वीप समूह है, जहां सबसे ज्यादा संख्या रहती है, इसके बाद लाइन द्वीप है जिसमें कुछ संख्या में लोग रहते हैं और तीसरा हिस्सा फीनिक्स है जहां कोई स्थायी आबादी नहीं है. इसका कुल क्षेत्रफल 811 वर्ग किलोमीटर है. यहां रहने वाले लोगों को माइक्रोनेशियाई बोलते हैं, यहां की स्थानीय भाषा गिल्बर्टीज है, हालांकि यहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है.

ब्रिटानिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1999 तक इस द्वीप समूह के दो टापू समुद्र से ढंक चुके हैं, बाकी पर खतरा बरकरार है. यहां के गिल्बर्ट समूह में वर्ष में औसत वर्षा 3000 मिमी तक होती है, लेकिन इसके दूसरे हिस्से में यह घटकर 1 हजार मिमी ही रह जाती है. इस वजह से द्वीप के कई हिस्से सूखे से भी जूझते हैं. यहां का औसत तापमान 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तक रहता है.

किरिबाती दुनिया के उन द्वीप समूहों में है जो ग्लोबल वार्मिंग के सबसे बड़े खतरे में हैं. वैज्ञानिक पहले ही अनुमान जता चुके हैं कि 2100 तक किरिबाती द्वीप समूह पूरी तरह डूब सकते हैं. इसके अलावा यहां द्वीपों में खारा पानी बढ़ रहा है, जिससे यहां खेती प्रभावित हो रही है. नारियल टारो व अन्य स्थानीय फसलें उगाना कठिन होने से खाने पीने का संकट बढ़ रहा है. बार बार तूफान आ रहे हैं, जो विनाशकारी साबित हो रहे हैं. मछली पकड़ना, नारियल की खेती और यहां की अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका का आधार है, लेकिन बढ़ते समुद्र स्तर और बदलते समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र से ये प्रभावित हो रहा है.

किरिबाती द्वीप समूह पर मंडरा रहते खतरे को देखते हुए यहां की सरकार ने फिजी में जमीन खरीदी है, ताकि यहां रह रहे लोगों को वहां स्थापित किया जा सके. यहां की सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्बन उत्सर्जन कम करने की अपील कर रही है. किरिबाती ने सबसे बड़े संरक्षित समुद्री क्षेत्र की स्थापना भी की है, ताकि किसी तरह द्वीप को बचाया जा सके|