टोल वसूली पर उठा सवाल: हाईकोर्ट ने कहा यदि सड़क पर मवेशी है तो NHAI का टोल वसूलना गलत
बिलासपुर। एनएच समेत प्रदेश की अन्य सड़कों पर मवेशियों की वजह से होने वाली परेशानियों को लेकर जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में एक नई हस्तक्षेप याचिका प्रस्तुत की गई है। इसमें बिलासपुर से जांजगीर तक एनएचएआई की सड़क पर मवेशियों के जमघट की तस्वीरें पेश की गईं। कहा गया है कि एनएचएआई अगर नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा है तो टोल वसूलना गलत है।
इस पर भी सुनवाई में हाईकोर्ट में जनता के लिए भी टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क पर मवेशियों के बैठने के लिए आम लोग भी बराबर जिम्मेदार हैं। वहीं, राज्य सरकार ने नए मुख्य सचिव की जॉइनिंग का हवाला देते हुए जवाब के लिए समय की मांग की। हाईकोर्ट ने सड़कों पर बढ़ते मवेशियों के खतरे को लेकर मुख्य सचिव को दो हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा देने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि सड़क पर घूम रहे व बैठे मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए तैयार रोडमैप बताया जाए। वहीं, पिछले आदेश के परिपालन में बिलासपुर के कलेक्टर ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया, आवारा पशुओं के प्रबंधन और सड़क हादसे रोकने के लिए किए गए कदमों की जानकारी दी गई।
तीन माह में तीन घटनाओं में 39 मवेशियों की मौत
कलेक्टर ने शपथ पत्र के साथ जुलाई से सितंबर तक सड़क हादसों में मवेशियों की मौतों का आंकड़ा भी दिया। बताया कि 14 जुलाई 2025 को कोटा के ग्राम बारीडीह में तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से 13 गायों की मौत और 4 घायल हुईं। वहीं, 28 जुलाई को बिल्हा ब्लॉक में एक अज्ञात वाहन ने 19 गायों को कुचला, जिनमें से 18 की मौत हो गई। 17 सितंबर को गतौरा के पास एनएच -130 पर 8 मवेशियों को कुचलने की घटना हुई। बताया कि एक अन्य मामले में आरोपी चालक राजतिलक पटेल की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रेलर क्रमांक सीजी 11एके 9525 जब्त कर लिया गया है।
एनएच पर लगा रहे सोलर लाइट
इसके अलावा बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों के जमाव वाले स्थानों पर सोलर लाइट लगाई जा रही है। दर्रीघाट और ढेका में इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है। संवेदनशील क्षेत्रों में इंडिकेटर बोर्ड लगाए गए हैं। ग्राम सभाओं में सड़क पर आवारा पशु प्रबंधन को अनिवार्य एजेंडा बनाया गया है। दीवार लेखन, पोस्टर, बैनर के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर महीने मवेशी मालिकों के साथ समीक्षा बैठकें करने के भी निर्देश हैं।
मवेशियों की सुरक्षा के लिए उठाए ये कदम
- घायल मवेशियों के उपचार के लिए भारत सरकार का टोल-फ्री नंबर 1962 जारी किया गया है।
- बिलासपुर जिले में 6 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां सक्रिय हैं।
- जोगीपुर गौ-अभयारण्य में 205 एकड़ भूमि पर 600 पशुओं की क्षमता वाले तीन शेड बनाए गए हैं। कुल 1600 वृद्ध मवेशियों को यहां रखने का लक्ष्य है।
- 7 नई जगहों पर गौधाम स्थापित करने का प्रस्ताव गौ सेवा आयोग को भेजा गया है।