छत्तीसगढ़ में SIR शुरू : सीईओ यशवंत कुमार ने राजनीतिक दलों के साथ की बैठक, घर-घर जाकर होगा मतदाताओं का सत्यापन
रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम की तिथियों की घोषणा कर दी है। इसी सिलसिले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने आज प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ के सभागार में आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पुनरीक्षण कार्यक्रम की तिथियों और अन्य आवश्यक जानकारियों से अवगत कराना था।
प्रत्येक मतदान केंद्र में लगभग 1,000 मतदाता होते हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए एक बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) होता है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कई मतदान केंद्र होते हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) होता है। ईआरओ एक उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) स्तर का अधिकारी होता है, जो कानून के अनुसार मसौदा मतदाता सूची तैयार करता है, दावे और आपत्तियां प्राप्त करता है और उन पर निर्णय लेता है तथा अंतिम मतदाता सूची तैयार कर प्रकाशित करता है।
प्रत्येक तहसील के लिए सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) होता है। जिला मजिस्ट्रेट ईआरओ के निर्णय के विरुद्ध प्रथम अपील की सुनवाई करते हैं। राज्य और संघ राज्य क्षेत्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) के निर्णय के विरुद्ध द्वितीय अपील की सुनवाई करते हैं।
बी.एल.ओ. (बूथ स्तरीय अधिकारी) नए मतदाता को शामिल करने के लिए फॉर्म-6 और घोषणा पत्र एकत्र करेंगे और मिलानऔर लिंकिंग (आधार से जोडऩा) में सहायता करेंगे। मतदाता को ई.एफ. (Electoral Form) भरने में मदद करेंगे, उसे एकत्र करेंगे और ई.आर.., ए.ई.आर.. को जमा करेंगे। प्रत्येक मतदाता के घर का कम से कम 3 बार दौरा करेंगे। मतदाता, विशेषकर शहरी मतदाता, अस्थायी प्रवासी, ई.एफ.. ऑनलाइन भी भर सकते हैं। इसके अलावा बी.एल.ओ. मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित तथा एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं की पहचान करेंगे। गणना चरण के दौरान ई.एफ. (E.F.) के अलावा, ई.एफ. के साथ कोई अन्य दस्तावेज एकत्र करने की आवश्यकता नहीं है।
ईआरओ, एईआरओ को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पात्र नागरिक छूटा नहीं है; और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल नहीं है। जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ईआरओ के फैसले के खिलाफ पहली अपील की सुनवाई करेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डीएम के निर्णय के खिलाफ दूसरी अपील की सुनवाई करेंगे।