Google Analytics —— Meta Pixel

नौकरी के लिए हाई कोर्ट से जीता केस, निचली अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा, पढ़िए पूरा मामला

1154216-hc-high-court

बिलासपुर। फूड इंस्पेक्टर की नौकरी से बर्खास्तगी के खिलाफ अदालती लड़ाई जीतने के दूसरे दिन निचली अदालत ने दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता प्रहलाद राठौर को उम्र कैद की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया है।

पेंड्रारोड निवासी प्रहलाद प्रसाद राठौर को भूतपूर्व सैनिक कोटे से 30 अगस्त 2018 को फूड इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था। 15 मार्च 2024 को पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर उन्हें सेवा से हटा दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि उनके खिलाफ पुराने आपराधिक मामले दर्ज थे, इसलिए वे सरकारी सेवा के लिए अयोग्य हैं। राठौर ने बर्खास्तगी को हाई कोर्ट में चुनौती दी। सिंगल बेंच ने जनवरी 2025 में उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील की।

अपील में तर्क दिया गया कि दोनों मामले वर्ष 2002 में उनके नाबालिग रहने के दौरान दर्ज हुए थे। पड़ोसी से मामूली झगड़े का मामला था। वर्ष 2007 में लोक अदालत में समझौते के बाद मामला बंद कर दिया गया था। इसके अलावा मामले में कोई जांच नहीं हुई थी और कोर्ट की ओर से दोषसिद्धि भी नहीं हुई। बर्खास्तगी से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया और जवाब भी नहीं मांगा गया। 3 नवंबर 2025 को हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया।

दो दिन बाद आया दूसरे मामले में फैसला, जेल भेजे गए राठौर

रायपुर कोर्ट में राठौर के खिलाफ अपहरण, धमकी और अनाचार का मामला चल रहा था। शिकायतकर्ता एक जिला पंचायत सदस्य है, जिन्होंने आरोप लगाया कि राठौर ने खुद को अविवाहित बताकर उनके साथ संबंध बनाए। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 31 जनवरी 2023 को होटल बुलाया, बंधक बनाकर अनाचार किया और अगले दिन सुनसान जगह ले जाकर अन्य लोगों के साथ मारपीट की।

सुनवाई पूरी होने पर स्पेशल जज (एट्रोसिटीज) पंकज कुमार सिन्हा की पीठ ने राठौर को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा के आदेश के बाद राठौर को रायपुर जेल में भेज दिया गया।

रीसेंट पोस्ट्स