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जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर ली अनुकंपा नियुक्ति: 28 साल बाद हुआ खुलासा, पुलिस जांच शुरू

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कोरिया| एसईसीएल चरचा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति लेने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाया और वर्ष 1998 में नौकरी हासिल कर ली। करीब 28 साल बाद मामला उजागर होने पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विशुनपुर जुनापारा निवासी प्रेमलाल प्रजापति ने चरचा थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, उनके पिता दशरथ प्रजापति तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। मंझले भाई रामकिशुन प्रजापति और छोटे भाई बाबूलाल प्रजापति का पहले ही निधन हो चुका है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रामकिशुन प्रजापति एसईसीएल चरचा क्षेत्र में दशरथ प्रजापति के नाम से कार्यरत थे। रामकिशुन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र छोटेलाल ने कथित रूप से षड्यंत्र कर एसईसीएल के सेवा अभिलेखों में हेरफेर करते हुए अपने पिता की जगह शिकायतकर्ता के जीवित पिता दशरथ प्रजापति का नाम दर्ज करा दिया।

फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर मिली नौकरी
आरोप है कि इसी संशोधित रिकॉर्ड के आधार पर छोटेलाल को अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई और वह 1998 से लगातार सेवा में बना रहा। प्रारंभिक जांच में भूमि रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेज और अन्य शासकीय अभिलेखों में छोटेलाल के पिता का नाम रामकिशुन प्रजापति दर्ज पाया गया है, जबकि एसईसीएल के सेवा रिकॉर्ड में दशरथ प्रजापति का नाम अंकित है। इस विरोधाभास से दस्तावेजों में गंभीर कूटरचना की आशंका जताई जा रही है।
शिकायतकर्ता प्रेमलाल प्रजापति का कहना है कि उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी करीब छह महीने पहले मिली। दस्तावेजों की जांच के बाद उन्होंने पुलिस और प्रशासन से न्याय की मांग की।

चरचा थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। एसईसीएल की अनुकंपा नियुक्ति फाइल, सेवा अभिलेख, वेतन भुगतान विवरण और मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में मामला धोखाधड़ी और जालसाजी का प्रतीत हो रहा है। पुलिस के अनुसार भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। यदि जांच में किसी विभागीय अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

करीब तीन दशक तक चले इस कथित फर्जीवाड़े ने एसईसीएल की भर्ती और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना पर्याप्त जांच के अनुकंपा नियुक्ति कैसे दी गई और इतने वर्षों तक रिकॉर्ड में त्रुटि कैसे बनी रही, इसे लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
शिकायतकर्ता ने फर्जी नियुक्ति निरस्त करने, अवैध रूप से प्राप्त वेतन व सेवा लाभ की वसूली और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।