ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी ‘अरामको’ पर किया हमला, अमेरिका और यूरोपीय देशों को जाने वाला तेल प्रभावित, क्रूड ऑयल की कीमतों में 9.32% की उछाल
‘अरामको’| इजराइल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व को तनाव के घेरे में ला दिया है। ईरान इजराइल और अमेरिका से बदला लेने के लिए सऊदी अरब, कतर, कुवैत, यूएई और बहरीन पर हमले कर रहा है। इसी सिलसिले में ईरान ने सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी, रास तनूरा, पर ड्रोन हमला किया। यह रिफाइनरी सऊदी की सरकारी तेल कंपनी, सऊदी अरामको, की है। हमले के बाद रिफाइनरी का उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
ईरान के ड्रोन हमले के तुरंत बाद सऊदी अरामको ने रास तनूरा रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया। रिफाइनरी बंद होने की खबरों के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखी गई, जो रिपोर्ट के अनुसार 9.32% तक बढ़ गई।
रास तनूरा रिफाइनरी की क्षमता लगभग 5.5 से 6 लाख बैरल प्रति दिन है। यह ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल दुनिया के सबसे बड़े ऑफशोर तेल लोडिंग टर्मिनलों में से एक है। यहां से बड़े तेल टैंकरों में कच्चा तेल भरकर अमेरिका, एशिया और यूरोप सहित कई देशों को भेजा जाता है।
सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है और पूरी तरह सऊदी सरकार के स्वामित्व में है। कंपनी की स्थापना 1933 में अमेरिकी कंपनियों के साथ समझौते के तहत हुई थी और 1980 में यह पूरी तरह सऊदी सरकार के नियंत्रण में आ गई। इसका मुख्यालय धहरान में स्थित है। अरामको के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और यह प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल उत्पादन करती है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक अहम आपूर्तिकर्ता बन गई है।
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अरामको की आय पर निर्भर करती है। यह कंपनी सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं बल्कि रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी सक्रिय है। इसके नियंत्रण में दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरिक तेल क्षेत्र, गवार, भी शामिल है। 2019 में अरामको ने अपना आईपीओ लॉन्च किया, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ माना गया। हाल के वर्षों में कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों में भी निवेश बढ़ा रही है।
वहीं, ईरान ने इजराइल के अलावा कतर, बहरीन और यूएई में हमलों की फिर से शुरुआत कर दी है। इस संघर्ष में अब लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया है, जिसने इजराइल में कई जगह बमबारी की। हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त है और उसने कहा है कि यह खामेनेई की मौत का बदला ले रहा है।