छत्तीसगढ़ में चढ़ा पारा, अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार…जानिए बचाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार गर्मी बढ़ रही है। मार्च महीने के शुरूआत से ही लोग गर्मी से हलाकान हो रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिला अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।
जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष सक्रिय रखे जाएं।
इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस, आईवी फ्लूड, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों तथा शीतलन संबंधी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रखने को कहा है, ताकि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।
विभाग ने बताया कि समुचित सुविधाओं से युक्त ऊष्मा आघात कक्ष रायपुर और दुर्ग जिला अस्पताल मे बनाये जा चुके हैं साथ ही अन्य सभी जिलों मे भी इस प्रकार के कक्ष बनाएं जाने निर्देश दिए गए हैं।
एम्बुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यकम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ स्मृति देवांगन ने कहा…
”अत्यधिक तापमान के संपर्क में आने से शरीर में हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर अवस्था में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जो चिकित्सकीय आपातकाल मानी जाती है।”
1. बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को गर्मी से अधिक जोखिम माना गया है। ऐसे में इन वर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
2. किसी व्यक्ति में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना बंद जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल ठंडी जगह पर ले जाएँ और आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
गर्मी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर सावधानी और जागरूकता को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आम नागरिकों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।