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छत्तीसगढ़ में बड़ा बदलाव: व्यापम खत्म, अब भृत्य से अधिकारी तक सभी भर्तियां कर्मचारी चयन बोर्ड करेगा, विष्णुदेव सरकार का ऐतिहासिक कदम

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रायपुर। विष्णुदेव साय कैबिनेट ने मंगलवार को कर्मचारी चयन मंडल के गठन पर मुहर लगा दी। इसके बाद भर्ती बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो गया है। जल्द ही यह अस्तित्व में आ जाएगा। अब राज्य सिविल परीक्षा को छोड़ सारी भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल करेगा।

कर्मचारी चयन मंडल बनने के बाद व्यवसायिक परीक्षा मंडल याने व्यापम को भंग कर दिया जाएगा। व्यापम की जगह अब कर्मचारी चयन मंडल काम करेगा। कैबिनेट में पारित ड्राफ्ट के अनुसार कर्मचारी चयन मंडल व्यापम से ज्यादा पावरफुल होगा।

राज्यपाल से नोटिफिकेशन जारी होने के तुरंत बाद व्यापम भंग कर दिया जाएगा। व्यापम की चेयरमैन रेणु पिल्ले ही कर्मचारी चयन मंडल की चेयरमैन होंगी। फर्क यह होगा कि व्यापम में सिर्फ चेयरमैन का पद था, मगर भर्ती बोर्ड में पीएससी की तरह सदस्य की भी नियुक्ति की जाएगी। याने कोई भी फैसला अब फुल बोर्ड करेगा। चेयरमैन से लेकर मेंबर तक रिटायर अफसर होंगे। चेयरमैन चीफ सिकरेट्री या उसके समकक्ष या रिटायर्ड चीफ सिकरेट्रगी को पोस्ट किया जाएगा। उसी तरह मेंबर रिटायर्ड सिकेट्री लेवल के अफसर को नियुक्त किया जाएगा। कुल मिलाकर कर्मचारी चयन मंडल काफी सशक्त होगा।

5000 शिक्षकों और कांस्टेबलों की भर्ती के कटु अनुभवों को देखते समझा जाता है कि सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल बनाने का फैसला किया। बता दें, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले साल सुशासन तिहार के दौरान शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया था। मगर साल भी बीत गया। सरकार के हस्तक्षेप और प्रेशर के बाद व्यापम ने पिछले हफ्ते परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया। जबकि, दूसरा सुशासन तिहार अगले महीने से प्रारंभ होने वाला है। दूसरा, कांस्टेबलों की भर्ती में ऐसी लापरवाहियां सामने आई कि पुलिस भर्ती का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया। पुलिस महकमे ने 6000 कांस्टेबलों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था। मगर नियम, शर्ते बनाने में ऐसी चूक कर डाली कि एक-एक अभ्यर्थी दो-दो, तीन-तीन जिलों में चयनित हो गए। इसका खामियाजा यह हुआ कि 6000 में से करीब पौने तीन हजार कांस्टेबल ही ज्वाईन कर पाए। इसके बाद सरकार को सक्षम भर्ती बोर्ड बनाने पर विचार करना पड़ा।

जिला स्तर पर हर साल भृत्य जैसे चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्तियां होती है। पटवारी की परीक्षा भी जिला स्तर पर ही ली जाती है। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जाती है। पेपर तक आउट कर दिया जाता है। सरकार अब कलेक्टरों से भर्ती का अधिकार लेकर कर्मचारी चयन मंडल को देगा। कर्मचारी चयन बोर्ड ही अब सारी परीक्षाएं लेगा।

व्यापम के रुल के अनुसार सारी परीक्षाएं एक साथ नहीं हो सकती थी। सारे विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से व्यापम को भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजते थे। मगर ओवरलोड के चलते परीक्षाओं में काफी टाईम लगता था। फिर एक ही नेचर या यों कहें एक ही तरह की परीक्षा अलग-अलग करानी पड़ती थी। जैसे एनआरडीए, पीडब्लूडी और सिंचाई विभाग को सब इंजीनियर की भर्ती करनी होती थी तो व्यापम को अलग-अलग परीक्षाएं लेनी होती थी। इसमें टाईम और मैनपावर काफी लगता था।

कर्मचारी चयन बोर्ड काफी सक्षम होगा। इसका रुल रेगुलेशन ऐसा बनाया जा रहा कि परीक्षाएं साफ-सुथरी ढंग से जल्दी होगी। कर्मचारी चयन बोर्ड अब सारे विभागों के एक नेचर की परीक्षाएं एक साथ लेगी और कैलेंडर के अनुसार परीक्षा के एक निश्चित समय के बाद उसका रिजल्ट घोषित कर देगा। परीक्षा फार्म भरते समय अभ्यर्थियों को च्वाइस भरना होगा। परीक्षा क्लियर करने के बाद उन्हें उसी पद पर ज्वाईन करना होगा।

व्यापम द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में सर्विस चुनने का विकल्प नहीं होता। या अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। उदाहरण के लिए किसी का आदिवासी विभाग में सहायक आयुक्त पर सलेक्शन हो गया और बाद में ट्रांसपोर्ट में तो वह आदिवासी विभाग से इस्तीफा देकर ट्रांसपोर्ट ज्वाईन कर लेगा। कुछ दिन पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर ने नायब तहसीलदार की नौकरी ज्वाईन कर ली। अब ऐसा नहीं होगा।

विष्णुदेव सरकार के इस फैसले का युवाओं के लिए इसलिए सौगात मानी जा रही क्योंकि अब युवाओं को परीक्षा देने के बाद रिजल्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा से पहले कैलेंडर जारी करेगा। जैसे केंद्र द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं का परीक्षा और रिजल्ट का टाईम पहले ही घोषित कर दिया जाता है, वैसे ही छत्तीसगढ़ में अब कर्मचारी चयन मंडल में होगा। अभी तो ऐसा होता है कि युवा परीक्षा देकर भूल जाते र्हैं कि उनका रिजल्ट आएगा भी नहीं। सब इंस्पेक्टर परीक्षा में ऐसा हुआ ही। पिछली सरकार में भर्ती हुई थी और रिजल्ट आया तीन साल बाद पिछले साल। ऐसा अमूमन परीक्षाओं में होता है।

छत्तीसगढ़ के अनेक विभागों में बड़े स्तर पर भर्तियां की जानी है। इसको देखते राज्य सरकार ने व्यापम की जगह कर्मचारी चयन मंडल गठित करने का फैसला किया है। दरअसल, 2028 में विधानसभा चुनाव है। इसमें अब मुश्किल से दो साल बच गया है। व्यापम के रहते इतनी सारी भर्तियां करना संभव नहीं था। इसलिए फास्ट भर्तियां करने की भी एक वजह है भर्ती बोर्ड बनाना। व्यापम के रहते यह कतई संभव नहीं था। भर्ती बोर्ड बनने का लाभ सरकार को अगले विधानसभा चुनाव में मिलेगा। क्योंकि, चुनाव से पहले बड़ी संख्या में बोर्ड के जरिये भर्तियां हो सकेंगी।

कर्मचारी चयन मंडल को लेकर राज्य सरकार काफी गंभीर है। सीएम के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने खुद कई राज्यों के परीक्षा मंडलों का अध्ययन किया। बताते हैं, असम का मॉडल उसमें सबसे अच्छा लगा। छत्तीसगढ़ में असम मॉडल को लागू किया जाएगा। हालांकि, भर्ती बोर्ड बनाना सामान्य प्रशासन विभाग का काम है। मगर सरकार इसको जल्दी करना चाहती है इसलिए ठोक बजाकर इसका ड्रा्फ्ट तैयार किया गया। सरकार इसे इतनी प्रायरिटी दे रही है कि कैबिनेट से पहले चीफ सिकरेट्री विकास शील, पीएस टू सीएम सुबोध सिंह और एसीएस होम मनोज पिंगुआ खुद बैठ कर इसका पूरा खाका तैयार किया। सरकार का मानना है कि भर्ती बोर्ड ऐसा बने, जिसमें गड़बड़ी या अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं हो।

मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सिकेट्री सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल को कई राज्यों के भर्ती बोर्डों की स्टडी कर बनाया गया है। भर्ती बोर्ड की कोशिश होगी कि कैलेंडर का पालन किया जाए। याने निर्धारित समय में परीक्षा होने के साथ रिजल्ट आ जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बेहतर सलेक्शन की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा।

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