कोर्ट का बड़ा फैसला: फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति अवैध, डॉ. राकेश गुप्ता ने उठाया था स्टोरकीपर को रजिस्ट्रार बनाने का मुद्दा

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बिलासपुर। डॉ. राकेश गुप्ता ने फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर राज्य शासन द्वारा की गई नियुक्ति को रिट ऑफ क्वारंटो याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार फार्मेसी कौंसिल द्वारा की गई नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है।

बता दें, याचिकाकर्ता डॉ राकेश गुप्ता के अधिवक्ता संदीप दुबे ने दायर याचिका में कौंसिल एक्ट के साथ ही रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए राज्य शासन द्वारा जारी मापदंड व नियमों का हवाला दिया है। याचिका में कहा है कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति में राज्य शासन ने कौंसिल एक्ट के अलावा अपने बनाए नियमों का खुलकर उल्लंघन कर दिया है।

याचिकाकर्ता डॉ राकेश गुप्ता के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा, छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी परिषद की स्थापना 09 अक्टूबर 2003 के आदेश द्वारा फार्मेसी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत की गई है। परिषद मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ औषध निर्माण शाला परिषद नियम, 1978 द्वारा शासित होती हैं, जो 1948 के अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए हैं। रजिस्ट्रार को 1978 के नियमों के नियम 2 (3) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है। रजिस्ट्रार का अर्थ है “रजिस्ट्रार” जिसे 1948 के अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत नियुक्त किया गया है। 1948 के अधिनियम की धारा 26 का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया है ,राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से रजिस्ट्रार की नियुक्ति परिषद का दायित्व है। याचिकाकर्ता के वकील संदीप दुबे ने नियम 96 (2) के आधार पर यह तर्क दिया कि सामान्यतः रजिस्ट्रार राज्य सरकार का सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारी होना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील का तर्क है कि 14 मार्च 2024 के आदेश के अनुसार रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्ति 1948 के अधिनियम और 1978 के नियमों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता डॉ राकेश गुप्ता ने अपनी याचिका में कहा है, फार्मेसी कौंसिल नियमों के तहत रजिस्ट्रार के पद पर एमबीबीएस डाक्टर को नियमित नियुक्त देने का प्रावधान है। फार्मेसी काैंसिल एक्ट मेडिकल साइंस का महत्वपूर्ण अंग है। राज्यों में इसका संचालन व क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्टेट फार्मेसी कौंसिल को है। इसमें फार्मासिस्ट को लाइसेंस जारी करना,उनका नाम रजिस्टर करना,फार्मेसी के क्षेत्र में कार्य करने की शिक्षा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य का संचालन व देखरेख करना होता है। राज्य शासन ने फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर जिस व्यक्ति की नियुक्ति की है वह योग्य ही नहीं है और ना ही उसके पास रजिस्ट्रार के पद पर कार्य करने की योग्यता है। अस्पताल के एक स्टोर कीपर को रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कौंसिल एक्ट व तय प्रावधान का सीधेतौर पर उल्लंघन किया गया है।

फार्मेसी कौंसिल एक्ट में दिए गए प्रावधान के अनुसार कौंसिल में कुल 15 मेंबर्स होते हैं। इसमें छह इलेक्टेड व छह नामिनेटेड मेंबर्स का चयन किया जाता है। कोई भी निर्णय सामान्य सभा की बैठक में बहुमत के आधार पर लिया जाता है।

फार्मेसी कौंसिल एक्ट व प्रावधान के अनुसार कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर सीनियर रिटायर्ड चिकित्सा अधिकारी को बैठाया जाता है। एक्ट में यह साफ लिखा हुआ है कि सीनियर रिटायर्ड चिकित्सा अधिकारी फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार होंगे। राज्य शासन ने नियमों विपरीत जाते हुए यह नियुक्ति कर दी है।

डा गुप्ता ने बताया है कि वह मेडिकल कौंसिल आफ छत्तीसगढ़ के निर्वाचित सदस्य हैं। छत्तीसगढ़ फार्मेसी कौंसिल एक्ट में दिए गए प्रावधान और व्यवस्था के तहत वह फार्मेसी कौंसिल आफ छततीसगढ़ के नामिनेटेड मेंबर हैं। वर्ष 2020 से वह फार्मेसी कौंसिल के नामित सदस्य हैं और अपना काम करते रहे हैं।

रिट आफ क्वारंटो याचिका के जरिए उन बातों व तथ्यों को सामने लाया जाता है जिसमें योग्यता ना होने के बाद भी नियम कानून व प्रावधानों को ताक पर नियुक्ति कर दी जाती है। वर्तमान याचिका में भी इसी तरह का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। राज्य शासन ने फार्मेसी कौंसिल एक्ट व प्रावधान का उल्लंघन करते हुए सीनियर एमबीबीएस डाक्टर के बजाय अस्पताल के एक स्टोरकीपर व तृतीय वर्ग कर्मचारी को फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया है। रिट आफ क्वारंटो याचिका में हाई कोर्ट का फैसला पब्लिक ला डिक्लेरेशन होगा। इस फैसले की बाध्यता रहेगी। हाई कोर्ट का फैसला कानून बन जाएगा। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने अश्वनी गुरदेकर की नियम विरुद्ध फार्मेसी काउंसल की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है।

मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस साहू ने अपने फैसले में कहा है, 14 मार्च 2024 का आदेश , जिसके द्वारा अश्वनी गुरदेकर को छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी परिषद के रजिस्ट्रार के पद का प्रभार दिया गया है, विधि के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया है और इसलिए कानून की दृष्टि से अस्थिर है। आदेश को रद्द किया जाता है। कोर्ट ने अश्वनी गुरदेकर को छूट देते हुए कहा, छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी परिषद के रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए अधिनियम 1948 की धारा 26 और नियमों 1978 में निहित प्रावधानों के अनुसार नई कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र हैं।

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