एसीएस रेणु पिल्ले होंगी कर्मचारी चयन बोर्ड की प्रथम अध्यक्ष, सरकारी भर्ती होगी फटाफट; नोटिफिकेशन के बाद व्यापम बंद
रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने युवाओं के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए व्यापम को भंग कर कर्मचारी चयन बोर्ड बनाने का फैसला किया है। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इस बिल को विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया गया और वहां से भी इसे अनुमोदन हो गया। सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी करने के लिए राजभवन को नोटशीट भेजा है। राज्यपाल का दस्तखत होते ही नोटिफिकेशन राजपत्र में प्रकाशित हो जाएगा। इसके साथ ही व्यापम भंग होकर उसकी जगह कर्मचारी चयन बोर्ड अस्तित्व में आ जाएगा।
प्रदेश की सबसे सीनियर आईएएस रेणु पिल्ले इस समय माध्यमिक शिक्षा मंडल के साथ व्यापम का भी दायित्व संभाल रही थीं। रेणु पिल्ले 1991 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल में दसवीं, बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं के अलावा और कोई ज्यादा काम नहीं होता। इसलिए, सरकार ने लगभग तय कर लिया है कि रेणु पिल्ले को ही कर्मचारी चयन मंडल का चेयरमैन बनाया जाए।
आईएएस रेणु पिल्ले साफ-सुथरी छबि की अधिकारी हैं। वे नियमों से इंच भर भी इधर-से-उधर नहीं होतीं। इसलिए कर्मचारी चयन बोर्ड का चेयरमैन बनाना परीक्षा की पारदर्शिता के लिए माकूल माना जा रहा। हालांकि, व्यापम सिंगल बोर्ड था। याने सिर्फ चेयरमैन होते थे। कर्मचारी चयन बोर्ड में चेयरमैन के अलावे तीन सदस्य भी होंगे। अर्थात चार लोगों का बोर्ड होगा। कर्मचारी चयन बोर्ड का ड्राफ्ट ऐसा बनाया गया है कि उसे सरकार का डायरेक्शन मानना पड़ेगा। व्यापम के रूल रेगुलेशन में सरकार का हस्तक्षेप नहीं था। एक तो सिंगल बोर्ड, उपर से सरकार उसमें कुछ नहीं कर सकती थी। इसलिए, 50000 शिक्षकों की भर्ती में सिस्टम को बड़े पापड़ बेलने पड़े थे। बहरहाल, नोटिफिकेशन जारी होते ही चेयरमैन की पोस्टिंग हो जाएगी। चेयरमैन के लिए क्रायटेरिया है प्रमुख सचिव और एसीएस के बीच का वर्तमान या रिटायर आईएएस अफसर होना चाहिए। रेणु पिल्ले एसीएस ही नहीं, बल्कि सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी हैं। उनके अलावे तीन सदस्यों की भी बोर्ड में नियुक्ति होगी। मेंबर के लिए ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल का अफसर या फिर या शिक्षाविद या प्रोफेशन होना चाहिए।
5000 शिक्षकों और कांस्टेबलों की भर्ती के कटु अनुभवों को देखते समझा जाता है कि सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल बनाने का फैसला किया। बता दें, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले साल सुशासन तिहार के दौरान शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया था। मगर साल भी बीत गया। सरकार के हस्तक्षेप और प्रेशर के बाद व्यापम ने पिछले हफ्ते परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया। जबकि, दूसरा सुशासन तिहार अगले महीने से प्रारंभ होने वाला है। दूसरा, कांस्टेबलों की भर्ती में ऐसी लापरवाहियां सामने आई कि पुलिस भर्ती का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया। पुलिस महकमे ने 6000 कांस्टेबलों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था। मगर नियम, शर्ते बनाने में ऐसी चूक कर डाली कि एक-एक अभ्यर्थी दो-दो, तीन-तीन जिलों में चयनित हो गए। इसका खामियाजा यह हुआ कि 6000 में से करीब पौने तीन हजार कांस्टेबल ही ज्वाईन कर पाए। इसके बाद सरकार को सक्षम भर्ती बोर्ड बनाने पर विचार करना पड़ा।
जिला स्तर पर हर साल भृत्य जैसे चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्तियां होती है। पटवारी की परीक्षा भी जिला स्तर पर ही ली जाती है। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जाती है। पेपर तक आउट कर दिया जाता है। सरकार अब कलेक्टरों से भर्ती का अधिकार लेकर कर्मचारी चयन मंडल को देगा। कर्मचारी चयन बोर्ड ही अब सारी परीक्षाएं लेगा।
व्यापम के रुल के अनुसार सारी परीक्षाएं एक साथ नहीं हो सकती थी। सारे विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से व्यापम को भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजते थे। मगर ओवरलोड के चलते परीक्षाओं में काफी टाईम लगता था। फिर एक ही नेचर या यों कहें एक ही तरह की परीक्षा अलग-अलग करानी पड़ती थी। जैसे एनआरडीए, पीडब्लूडी और सिंचाई विभाग को सब इंजीनियर की भर्ती करनी होती थी तो व्यापम को अलग-अलग परीक्षाएं लेनी होती थी। इसमें टाईम और मैनपावर काफी लगता था।
कर्मचारी चयन बोर्ड काफी सक्षम होगा। इसका रुल रेगुलेशन ऐसा बनाया जा रहा कि परीक्षाएं साफ-सुथरी ढंग से जल्दी होगी। कर्मचारी चयन बोर्ड अब सारे विभागों के एक नेचर की परीक्षाएं एक साथ लेगी और कैलेंडर के अनुसार परीक्षा के एक निश्चित समय के बाद उसका रिजल्ट घोषित कर देगा। परीक्षा फार्म भरते समय अभ्यर्थियों को च्वाइस भरना होगा। परीक्षा क्लियर करने के बाद उन्हें उसी पद पर ज्वाईन करना होगा।
व्यापम द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में सर्विस चुनने का विकल्प नहीं होता। या अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। उदाहरण के लिए किसी का आदिवासी विभाग में सहायक आयुक्त पर सलेक्शन हो गया और बाद में ट्रांसपोर्ट में तो वह आदिवासी विभाग से इस्तीफा देकर ट्रांसपोर्ट ज्वाईन कर लेगा। कुछ दिन पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर ने नायब तहसीलदार की नौकरी ज्वाईन कर ली। अब ऐसा नहीं होगा।
विष्णुदेव सरकार के इस फैसले का युवाओं के लिए इसलिए सौगात मानी जा रही क्योंकि अब युवाओं को परीक्षा देने के बाद रिजल्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा से पहले कैलेंडर जारी करेगा। जैसे केंद्र द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं का परीक्षा और रिजल्ट का टाईम पहले ही घोषित कर दिया जाता है, वैसे ही छत्तीसगढ़ में अब कर्मचारी चयन मंडल में होगा। अभी तो ऐसा होता है कि युवा परीक्षा देकर भूल जाते र्हैं कि उनका रिजल्ट आएगा भी नहीं। सब इंस्पेक्टर परीक्षा में ऐसा हुआ ही। पिछली सरकार में भर्ती हुई थी और रिजल्ट आया तीन साल बाद पिछले साल। ऐसा अमूमन परीक्षाओं में होता है।
छत्तीसगढ़ के अनेक विभागों में बड़े स्तर पर भर्तियां की जानी है। इसको देखते राज्य सरकार ने व्यापम की जगह कर्मचारी चयन मंडल गठित करने का फैसला किया है। दरअसल, 2028 में विधानसभा चुनाव है। इसमें अब मुश्किल से दो साल बच गया है। व्यापम के रहते इतनी सारी भर्तियां करना संभव नहीं था। इसलिए फास्ट भर्तियां करने की भी एक वजह है भर्ती बोर्ड बनाना। व्यापम के रहते यह कतई संभव नहीं था। भर्ती बोर्ड बनने का लाभ सरकार को अगले विधानसभा चुनाव में मिलेगा। क्योंकि, चुनाव से पहले बड़ी संख्या में बोर्ड के जरिये भर्तियां हो सकेंगी|