नामांतरण में लापरवाही पड़ी भारी, कमिश्नर ने ईई और सीनियर असिस्टेंट को हटाया—किया रायपुर अटैच

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बिलासपुर। सरकारी दफ्तरों में काम किस अंदाज में होता है, फाइलें कैसे मूव करती है और कुछ फाइलें कैसे दब जाती है, इस तरह के कामकाज का अंदाज लगाना है तो छत्तीसगढ़ बिलासपुर के कार्यालय में जो कुछ हो रहा है, वही काफी है। दरअसल एक युवक बीते सालभर से दफ्तर का चक्कर काट रहा है। उनकी फाइल है कि मिल नहीं रही है। मैडम का याददाश्त ताजा करने के लिए उनसे तरीका खोजा और बादाम का पैकेट थमा दिया। शायद याददाश्त ताजी हो जाए और फाइल मिल जाए। वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी के साथ वायरल भी हो रहा है।

बिलासपुर जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। युवक तोरन साहू ने तकरीबन एक साल पहले तिफरा स्थित EWS.फ्लैट क्रमांक 41/483 को खरीदा था। नामांतरण के लिए 17 मार्च 2025 को उसने आवेदन दिया था। जांच में यह बात सामने आई है, 11 नवंबर 2025 को ही नामांतरण पूर्व सूचना प्रकाशन का पत्र तैयार हो चुका था और उस पर संपदा अधिकारी के हस्ताक्षर भी हो गए थे। जावक शाखा से नंबर (3131) मिलने के बावजूद अधिकारियों ने इस पत्र को हितग्राही को भेजने के बजाय फाइल में ही दबाकर रखा था। जब भी युवक नामांतरण की फाइल लेने हाउसिंग बोर्ड का दफ्तर जाता है, उनको एक ही जवाब मिलता है, फाइल कहीं खो गई है मिल नहीं रही है।

बीते एक साल से एक ही जवाब सुनते युवक भी परेशान हो गया । फाइल खोजने के लिए उसने नायाब तरीका खोज निकाला। दरअसल जिस मैडम को उसने दस्तावेजों की फाइल सौंपी थी, मैडम का याददाश्ता ताजा करने के लिए उसने 500 ग्राम बादाम का पैकेट भेंट कर दिया है। मैडम से कहा, इसे खाने के बाद शायद याद आ जाए कि उसकी फाइल हैं कहां। मिल जाएगी तो काम भी हो जाएगा। बहरहाल, फाइल कब मिलेगी यह तो नहीं पता, पर युवक का यह तरीका सोशल मीडिया में अब जमकर वायरल हो रहा है।