CSMCL ओवरटाइम घोटाले में बड़ा एक्शन: 7 एजेंसी संचालक-प्रतिनिधि गिरफ्तार, 7 दिन की रिमांड मंजूर
रायपुर। CSMCL ओवर टाइम भुगतान घोटाला में EOW/ACB ने 07 आरोपियों को गिरफ्तार कर स्पेशल कोर्ट में पेश किया। स्पेशल कोर्ट ने जरुरी पूछताछ के लिए जांच एजेंसियों को 11 मई तक रिमांड पर दे दिया है। पुलिस रिमांड के दौरान जांच एजेंसियां आरोपियों से फर्जी बिलिंग, अवैध कमीशन वितरण, राशि के अंतिम उपयोग, लाभार्थियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में विस्तृत पूछताछ करेगी। आरोपियों से पूछताछ में और भी महत्वपूर्ण खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवर टाइम भुगतान के नाम पर मैन पावर एजेंसियों को लगभग ₹115 करोड़ का भुगतान किया जाना पाया गया। विवेचना में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है, ओवर टाइम भुगतान के नाम पर फर्जी एवं बढ़े हुए बिल तैयार कर राशि का आहरण किया गया। उक्त राशि का उपयोग कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान करने के बजाय CSMCL के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर 11 मई 2026 तक पुलिस रिमाण्ड प्राप्त किया गया है तथा प्रकरण में अग्रिम विवेचना जारी है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एन्टी करप्शन ब्यूरो ने CSMCL ओवर टाइम भुगतान घोटाला में धारा-7(बी), 8 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथासंशोधित 2018 एवं धारा-467, 468, 471, 120-बी भा.द.वि. के अंतर्गत 04 मई.2026 को 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
नीरज कुमार चौधरी, वित्त एवं कर सलाहकार (सी.ए.), ईगल इंटर साल्युशन लिमिटेड एवं अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड, अजय लोहिया, डायरेक्टर, अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड, अजीत दरंदले, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज कंपनी, अमित प्रभाकर सालुंके, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज लिमिटेड, अमित मित्तल, चेयरमेन एवं डायरेक्टर, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड कंपनी, राजीव द्विवेदी, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड एवं संजीव जैन, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के अधिकारियों ने 29 नवंबर 2023 को 03 व्यक्तियों से नगद ₹28.80 लाख जब्त कर आवश्यक कार्यवाही हेतु छत्तीसगढ़ शासन को सूचना प्रेषित की थी, जिसके आधार पर ब्यूरो में एफआईआर दर्ज किया गया था।
विवेचना में पाया गया कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवर टाइम के नाम पर उक्त मैन पावर एजेंसियों को लगभग ₹115 करोड़ का भुगतान किया गया। उक्त रकम मैन पावर एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को भुगतान की जानी थी, परन्तु संबंधित डायरेक्टर्स द्वारा ओवर टाइम के लिए फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का आहरण कर उसका उपयोग CSMCL के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया जाता था। इस राशि का बड़ा हिस्सा कंपनियां स्वयं अपने पास रखती थी।
विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया है, संबंधित मैन पावर एजेंसियों द्वारा ओवर टाइम कार्य के नाम पर प्रस्तुत बिलों में वास्तविक कार्य, कर्मचारियों की उपस्थिति एवं भुगतान की स्थिति के अनुरूप पारदर्शिता नहीं रखी गई। प्रथम दृष्टया यह पाया गया, ओवर टाइम भुगतान की आड़ में फर्जी एवं बढ़े हुए बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि का अनियमित आहरण किया गया, जिससे शासन को गंभीर आर्थिक क्षति होना परिलक्षित होता है।
अब तक की विवेचना में यह भी पाया गया है कि ओवर टाइम भुगतान के नाम पर प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों को भुगतान करने के बजाय मैन पावर एजेंसियों के संचालकों, संबंधित अधिकारियों एवं अन्य प्राइवेट व्यक्तियों के बीच कमीशन के रूप में वितरित किया जाता था। इस प्रकार शासकीय भुगतान प्रक्रिया का दुरुपयोग कर एक संगठित आर्थिक अपराध को अंजाम दिया गया।